दिव्यांग विभागाध्यक्षों की यातनाओं से हुए तंग

सुंदरनगर (मंडी). दिव्यांगों को न्याय दिलाने के लिए भले ही कड़े कानून बने हों. बावजूद इसके आज भी दिव्यांग अपने हकों के लिए दर दर भटकने को विवश है. इस सिलसिले में आईपीएच विभाग से मुख्य प्रारूपकार पद से सेवानिवृत एवं मुख्य समाजसेवी कुशल कुमार सकलानी ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर दिव्यांगों को तमाम हक सहजता से दिलाने की मांग एक पत्र के माध्यम से की है.
उन्होंने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजे गए पत्र में कहा कि अंतिम आस की किरण अब चीफ जस्टिस से ही बंधी हुई है. दिव्यांगों को हर विभाग के अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काटने के बावजूद भी कानूनी प्रावधानों के तहत लाभ नहीं मिल रहे हैं. उन्हें बार-बार अपने हकों को पाने के लिए कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते हैं.
उन्होंने संबंधित विभागों के विभागाध्यक्षों के खिलाफ नियमों के लिए दिव्यांगों के मामले में बरती जा रही लापरवाही के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाने का आग्रह किया है, ताकि दिव्यांगों के साथ हो रहे अत्याचारों से उन्हें राहत मिल सके और अपने हकों को पाने के लिए जुझना न पड़े.
उन्होंने कहा कि दिव्यांगों को मदद सरकारी और अर्धसरकारी विभागों समेत अन्य संस्थानों में सभी प्रकार की एक समान नीति के तहत सुविधाएं उनकी सुविधा के तहत मिलनी चाहिए, लेकिन वर्तमान में दिव्यांगों को वंचित किया जा रहा है.  अपने चेहतों को लाभ देकर इस काडर के पैसे का दुरपयोग हो रहा है. उन्होंने मांग की है कि दिव्यांगों के मसलों से जुड़े तमाम पहलूओं की गहनता से जांच की जाए और इसमें संलिप्त अधिकारियों को बेनकाब करके सजा और जुर्माने किए जाए, जोकि बाकायदा कानून व एक्ट में प्रावधान है.
आईपीएच विभाग से मुख्य प्रारूपकार पद से सेवानिवृत एवं समाजसेवी कुशल कुमार सकलानी का कहना है कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को तीन पत्र का लिखित शिकायत में पत्र भेजा गया है. उनका कहना है कि विश्व की ओर से दिव्यांगों के हितो में करोडो की सहायता दी जाती है, लेकिन वह सहायता दिव्यांगों पर और उनको मिलने वाले लाभ और पर खर्च नहीं की जा रहा. उनका कहना है सरकार की ओर यह लाभ अन्य लोगो में वितरित किया जा रहा है.
सकलानी का कहना है कि 1800 करोड़ मात्र निजी सेक्टर का था जो आज तक कहा ख़र्च हुआ है. इसका जवाब उन्होंने सरकार से मांगा है. दिव्यांगों को किसी भी प्रकार का लाभ नहीं दिया जा रहा, सकलानी का कहना है की अगर किसी अधिकारी से इस बारे में बात की जाये तो उनको धमकाया जा रहा है की आप इन मुद्दों को लेकर दिव्यांगों के साथ क्यों खड़े है. उन्होंने चीफ जस्टिस से मांग की है की दिव्यांगों को सभी प्रकार प्रदान करवाई जाये.