नई दिल्ली. अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन H-1B वीज़ा प्रोग्राम में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। $100,000 की mandatory fee hike के बाद अब H-1B visa के इस्तेमाल और पात्रता को लेकर नई पाबंदियां लगाने की योजना बनाई जा रही है।
DHS का नया प्रस्ताव – H-1B नियमों में बदलाव की तैयारी
अमेरिका के Department of Homeland Security (DHS) ने अपनी नई नियामक एजेंडा में “Reforming the H-1B Nonimmigrant Visa Classification Program” शीर्षक से एक नियम परिवर्तन प्रस्तावित किया है।
इस प्रस्ताव में शामिल हैं—
वीज़ा कैप से छूट पाने के मानदंडों में बदलाव
उन नियोक्ताओं पर सख्त निगरानी जिन्होंने वीज़ा नियमों का उल्लंघन किया है।
थर्ड पार्टी प्लेसमेंट्स पर बढ़ी हुई मॉनिटरिंग
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि DHS वार्षिक H-1B visa cap exemptions को सीमित करने की योजना बना रहा है या नहीं। लेकिन अगर ऐसा हुआ तो इससे universities, research institutions और healthcare organizations जैसी संस्थाएं प्रभावित होंगी, जो अभी तक छूट का लाभ लेती हैं।
क्यों बढ़ेंगी भारतीयों की परेशानी
DHS के अनुसार, ये बदलाव “H-1B nonimmigrant program की पारदर्शिता और integrity बढ़ाने और अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन एवं कार्य स्थितियों की रक्षा करने” के लिए किए जा रहे हैं।
हालांकि, इन प्रस्तावों से भारतीय छात्रों और युवा प्रोफेशनल्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है, जो अमेरिका में काम करने का सपना देखते हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नए नियम को दिसंबर 2025 तक लागू किया जा सकता है।
Lottery System की जगह Wage-Based Selection?
पहले ऐसी भी खबरें आई थीं कि ट्रंप प्रशासन पारंपरिक H-1B lottery system को खत्म कर wage-based selection process से बदलने पर विचार कर रहा है। इसका मतलब यह होगा कि उच्च वेतन वाले आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी।
What is H-1B Visa? क्यों है इतना महत्वपूर्ण
H-1B visa एक अस्थायी (temporary) कार्य वीज़ा है, जो अमेरिकी कंपनियों को उच्च तकनीकी कौशल वाले विदेशी नागरिकों को काम पर रखने की अनुमति देता है।
यह वीज़ा 1990 के Immigration Act के तहत बनाया गया था ताकि अमेरिका उन क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त विदेशी पेशेवरों को रोजगार दे सके, जहां देश में पर्याप्त स्थानीय टैलेंट नहीं है।
H-1B वीज़ा उन लोगों के लिए स्थायी निवास (Green Card) का रास्ता नहीं है, लेकिन कई पेशेवर बाद में अपनी स्थिति बदलकर अमेरिका में बस जाते हैं।
अमेरिकी सरकार हर साल 65,000 H-1B visas जारी करती है, जबकि अमेरिकी विश्वविद्यालय से मास्टर या उससे ऊंची डिग्री रखने वालों के लिए अतिरिक्त 20,000 visas आरक्षित हैं।
विश्वविद्यालयों और गैर-लाभकारी संगठनों को इस वार्षिक सीमा से छूट दी जाती है।
भारतीय IT सेक्टर पर असर
Pew Research Center की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में स्वीकृत H-1B applications में से करीब 75% भारतीय नागरिकों के थे।
साल 2012 से अब तक लगभग 60% H-1B visas कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी से जुड़े पेशों के लिए जारी किए गए हैं।
हालांकि, यह वीज़ा केवल IT कंपनियों तक सीमित नहीं है — hospitals, banks, universities और कई अन्य सेक्टर भी H-1B वीज़ा के लिए आवेदन करते हैं।
क्या कहता है अमेरिकी कानून
अमेरिकी कानून के तहत कंपनियों को H-1B कर्मचारियों को उसी या उससे अधिक वेतन देना होता है जितना किसी अमेरिकी कर्मचारी को समान योग्यता और अनुभव के लिए दिया जाता है।
साथ ही, वीज़ा प्रोसेसिंग के लिए government fees (अक्सर $6,000 से ज्यादा) भी नियोक्ताओं को चुकानी होती है।
ट्रंप प्रशासन के ये नए कदम Indian tech professionals और students के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकते हैं।
जहां पहले ही H-1B visa fees में भारी बढ़ोतरी हो चुकी है, वहीं अब पात्रता और चयन प्रक्रिया में सख्ती भारतीयों के लिए अमेरिका में काम पाने के अवसरों को और सीमित कर सकती है।
