नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका के बीच हुए अहम ट्रेड डील की घोषणा करते हुए भारतीय सामानों पर लगने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को 25% से घटाकर 18% करने का फैसला किया है। इससे भारत को वैश्विक निर्यात बाजार में बड़ी राहत मिली है।
गौरतलब है कि इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर कुल 50% तक टैरिफ लगाया था, जिसमें रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर 25% का दंडात्मक शुल्क भी शामिल था। ताजा कटौती के बाद भारत को क्षेत्र की अन्य प्रतिस्पर्धी निर्यात अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में स्पष्ट बढ़त मिल गई है।
किन देशों पर कितना अमेरिकी टैरिफ?
| देश | टैरिफ (%) |
|---|---|
| भारत | 43 (2 फरवरी के बाद कटौती के साथ) |
| चीन | 37 |
| पाकिस्तान | 19 |
| यूरोपीय संघ | 15 |
| स्विट्जरलैंड | 15 |
| वियतनाम | 20 |
| ब्राजील | 50 |
| बांग्लादेश | 20 |
| अफगानिस्तान | 15 |
| इंडोनेशिया | 19 |
| मलेशिया | 19 |
| कंबोडिया | 19 |
| थाईलैंड | 19 |
| यूनाइटेड किंगडम | 10 |
| दक्षिण अफ्रीका | 30 |
| दक्षिण कोरिया | 15 |
| जापान | 15 |
| म्यांमार | 40 |
| लाओस | 40 |
| सीरिया | 40 |
| कनाडा | 25 |
| मैक्सिको | 25 |
नीचे विभिन्न देशों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए मौजूदा टैरिफ की सूची दी गई है—
देश टैरिफ (%)
भारत 43 (2 फरवरी के बाद कटौती के साथ)
टैरिफ लगाने का मतलब क्या होता है?
किसी देश पर ऊंचा टैरिफ लगाने का मतलब है कि उस देश से आयात होने वाले सामान पर अधिक शुल्क देना होगा। इससे आयातित उत्पाद महंगे हो जाते हैं, जिसका बोझ अक्सर कंपनियां उपभोक्ताओं पर डाल देती हैं।
आमतौर पर टैरिफ बढ़ाने का मकसद घरेलू उद्योगों की सुरक्षा, व्यापारिक दबाव बनाना या रणनीतिक कारणों से दूसरे देश की नीतियों में बदलाव कराना होता है। हालांकि, अल्पकाल में इससे घरेलू उद्योगों को राहत मिल सकती है, लेकिन लंबे समय में महंगाई, व्यापार लागत में वृद्धि और वैश्विक तनाव बढ़ने का खतरा रहता है।
