नई दिल्ली: संसद भवन में भारी सुरक्षा चूक के मामले में गिरफ्तार किए गए छह लोगों पर आतंकवाद विरोधी कानून, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप लगाए गए हैं.
युवक अपने जूते में कुछ स्प्रे छिपाकर लाए थे. स्प्रे करते ही सदन में पीला धुआं फैलने लगा. सांसदों ने दोनों को पकड़ लिया और उनकी पिटाई की.
क्या है UAPA कानून ?
यूएपीए की धारा-15 आतंकी गतिविधि को परिभाषित करती है. इस कानून के तहत कम से कम 5 साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है. अगर आतंकी घटना में किसी की जान चली जाती है तो दोषी व्यक्ति को सजा-ए-मौत या फिर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है.
अगर कोई भी व्यक्ति आतंक फैलाने के मकसद से देश की अखंडता, एकता, सुरक्षा और संप्रभुता तो खंडित करने की कोशिश करता है या फिर देश या देश के बाहर भारतीयों के साथ आतंकी घटना कने की कोशिश करता है, तो वह UAPA कानून के दायरे में आएगा.
क्यों लाया गया है UAPA?
यूएपीए कानून को आतंकी गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए 1967 में लाया गया था. इस कानून के तहत उन लोगों पर कार्रवाई की जाती है जो आतंकी गतिविधियों में संदिग्ध होते हैं. UAPA कानून राष्ट्रीय जांच एजेंसी को संदिग्ध या फिर आरोपी की संपत्ति जप्त या फिर कुर्क करने का अधिकार देती है.
UAPA कानून संविधान के अनुच्छेद-19(1) के तहत मौलिक अधिकारों पर तर्कसंगत सीमाएं लगाने के इरादे से पेश किया गया था. यूएपीए का मकसद देश की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सरकार को अधिकार देना है. यह कानून कुछ खास हालातों में ही लागू होता है.
IPC के होते हुए क्यों पड़ी UAPA कानून की जरूरत?
UAPA अकेला ऐसा कानून है जो आतंकवाद और गैरकानूनी गतिविधियों पर लागू होता है. ऐसे कई क्राइम थे, जिनका आईपीसी में जिक्र तक नहीं था. यही वजह रही कि 1967 में गैरकानूनी गतिविधि अधिनियम की जरूरत महसूस की गई और यूएपीए कानून लाया गया. यह कानून गैरकानूनी और आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम कसने में सक्षम है.
