नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियम—‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता के संवर्धन संबंधी विनियम, 2026’—को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जता दी है। यह याचिका मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मेंशन की गई, जिसमें तर्क दिया गया कि नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के प्रति भेदभावपूर्ण हैं।
क्या है मामला
UGC ने हाल ही में उच्च शिक्षा संस्थानों में शिकायत निवारण और वंचित वर्गों के समर्थन के लिए एक संरचित ढांचा तय करते हुए नए नियम अधिसूचित किए हैं। हालांकि, इन नियमों में “जाति-आधारित भेदभाव” की परिभाषा को लेकर छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों के बीच असंतोष देखा जा रहा है।
UGC के नए नियमों के प्रमुख प्रावधान
हर उच्च शिक्षा संस्थान में Equal Opportunity Centre (EOC) की स्थापना अनिवार्य।
यह केंद्र सिविल सोसाइटी, स्थानीय प्रशासन, पुलिस, मीडिया और जिला/राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों से समन्वय करेगा, ताकि जरूरतमंदों को कानूनी सहायता मिल सके।
केंद्र में OBC, SC, ST, दिव्यांग (PwDs) और महिलाओं का प्रतिनिधित्व होगा।
इक्विटी से जुड़ी नीतियों/कार्यक्रमों का क्रियान्वयन, शैक्षणिक व वित्तीय मार्गदर्शन, और संबंधित प्राधिकरणों के साथ समन्वय इसकी जिम्मेदारी होगी।
सोशल मीडिया पर विरोध
UGC के नए नियमों के खिलाफ सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X पर #ShameonUGC ट्रेंड कर रहा है। कई यूजर्स का आरोप है कि नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को लक्षित करते हैं और गलत शिकायतों से बचाव के पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं।
आगे क्या
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि नए UGC नियमों की वैधता और उनके प्रावधानों पर क्या रुख अपनाया जाता है। मामले पर सभी पक्षों की दलीलें आने वाले दिनों में सुनी जाएंगी।
