फेसबुक से नाता तोड़ना समाधान नहीं है

नई दिल्ली.  जब भी हम किसी से सोशल मीडिया के बारे में पुछते हैं तो सबसे पहले हमारे दिमाग फेसबुक आता है. भारत में लगभग 241 मिलियन लोग फेसबुक इस्तेमाल करते हैं. इसके साथ सभी राजनितिक पार्टियों के नेता अपने प्रचार-प्रसार के लिए के इसका उपयोग करते हैं और जितने भी न्यूज चैनल हैं सभी फेसबुक के जरिए खबर दिखाते हैं.

अब आप सोच रहे होंगे अचानक से आज हम इसके बारे में क्यों बात कर रहें, तो चलिए हम आपको बताते है दरअसल फेसबुक के सह-संस्थापक क्रिस ह्यूज ने कंपनी के हेड मार्क जुकरबर्ग को जरूरत से ज्यादा ताकतवर कह दिया है, इसलिए अब फेसबुक को बांटना जरूरी है. ह्यूज ने आरोप लगाया कि फेसबुक अपनी प्रतियोगी कंपनियों को या तो खरीद लेता है या फिर उनकी नकल कर लेता है, ताकि सोशल मीडिया के क्षेत्र में उसका वर्चस्व बना रहे. इससे इनवेस्टर भी किसी प्रतिद्वंदी कंपनी में पैसा नहीं लगाते, क्योंकि उन्हें पता है कि वह ज्यादा दिन तक नहीं टिकेंगे.

फेसबुक से 10 साल पहले ही अलग हो गए थे ह्यूज

जुकरबर्ग और क्रिस ह्यूज ने ही हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में 2004 में दो अन्य दोस्तों के साथ मिलकर फेसबुक शुरू किया था. हालांकि, करीब 10 साल पहले ह्यूज ने खुद को कंपनी से अलग कर लिया था. फिलहाल वह अमेरिका में इकोनॉमिक सिक्योरिटी प्रोजेक्ट नाम के संगठन से जुड़े हैं. यह संगठन देश में यूनिवर्सल बेसिक इनकम लागू करने की मांग उठा रहा है.

”सरकार ही फेसबुक का कोई समाधान निकाले”

फेसबुक को-फाउंडर क्रिस ह्यूस चाहते हैं कि सरकार ही फेसबुक का कोई समाधान निकाले. अमेरिकी सरकार से फेसबुक का एकाधिकार खत्म करने की अपील की है. क्रिस ने कहा कि अमेरिकी सरकार को दो चीजें करनी चाहिए. पहली कि वह फेसबुक का मोनोपॉली खत्म करे और इसे नियम के मुताबिक चलाए. इसके अलावा इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप को फेसबुक से अलग कर दें और कंपनी के किसी भी तरह के नए अधिग्रहण को कुछ सालों तक रोक दे. उन्होंने इस तरफ भी इशारा किया है कि फेसबुक के पास अपने प्रतिद्वंद्वी को खत्म करने के कई तरीके हैं. इनमें संभावित प्रतिद्वंद्वी को खरीदना, उन्हें कॉपी करना और उन्हें ब्लॉक करना है.

उन्होंने ये भी कहा है कि फेसबुक द्वारा इंस्टाग्राम को अधिग्रहण करने के लिए जो फेडरल ट्रेड कमिशन ने अप्रूवल दिया है वो सरकार की सबसे बड़ी गलती है. उन्होंने कहा है कि सरकार फेसबुक को दो अलग-अलग हिस्सों में बांटन के लिए दबाव डाले.