सत्ता की हनक और रसूखदारों पर कौन सा यूपीकोका लगना चाहिए

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से अपराध के खात्मे की बात को सूबे की पुलिस इतना दिल से लगा चुकी है कि अब ऐसा लगता है पुलिस पूरी तरह से स्वतंत्र है कि किसी को भी अपराधी ठहराकर उसका खात्मा कर दे. पहले लगातार एनकाउंटर पर उठ रहे सवालों के बाद अब एक और गंभीर इल्जाम उत्तर प्रदेश के खाकी वालों पर लगा है. रेप केस में पीड़िता की सुनवाई के बजाए उल्टा उसी पर पुलिस का कहर टूट पड़ा है.

उन्नाव के बांगरमऊ से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर गैंगरेप जैसा गंभीर आरोप लगा है. लेकिन हद तो यह है कि पहले तो उस पीड़ित लड़की की कहीं सुनवाई ही नहीं हुई. वह इंसाफ के लिए दर-दर भटकती रही और जब पुलिस नींद से जागी भी तो उल्टा लड़की के घरवालों पर ही ऐक्शन ले लिया गया.

लड़की के पिता को मारपीट के आरोप में अंदर कर दिया गया और बाद में इतनी बेरहमी से पीटा गया कि पीड़िता के पिता ने दम तोड़ दिया. यह तस्वीर उस सूबे की है जिसके मुख्यमंत्री यह ढिंढोरा पीटते हुए आए थे कि यूपी में जंगलराज है. तमाम एनकाउंटर कर दिए. ख़बर बनी कि अब सूबे में अपराधी ख़ुद ही सरेंडर कर रहे हैं. यहां तक अभी कुछ दिनों पहले यूपीकोका जैसा एक सख्त कानून भी लाया गया. लेकिन यह सब किसके लिए है.

ये सब आम जनता के लिए है. सारे नियम कानून बस आम लोगों के लिए है. क्योंकि ख़ास लोग तो इन सब मामलों के बीच सिस्टम को ठेंगा दिखा देते हैं. विधायक जी की पत्नी का कहना है कि उनके पति निर्दोष हैं. उन पर झूठा इल्जाम लगाया जा रहा है. लेकिन लड़की सही आरोप लगा रही हैं या ग़लत ये तो तब ही पता चल पाएगा जब एफआईआर होगी. विधायक जी अपने रसूख पर आरोप लगाने वालों को निचले स्तर के लोग कहकर सीना तान के घूम रहे हैं. अपराधियों को चुन-चुनकर मारने वाली यूपी पुलिस की इतनी भी हिम्मत नहीं हो रही है कि वह विधायक से पूछताछ ही कर लें.

इसे हम किस श्रेणी में रखेंगे कि एक लड़की का गैंगरेप होता है और उसे इंसाफ मिलने के बजाए वह अपने ही पिता की लाश देखती है. इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका संदेह से भरी है. नेताओं के आगे पुलिस इतनी लाचार है कि वह मामले को दबाने की कोशिश में लगी है.

जिस तरह से पुलिस कस्टडी में मौत हुई और उसके बाद जो वीडियो सामने आ रहे हैं वह दर्शाने के लिए काफ़ी है कि अगर बात सत्ता के ताक़त से जुड़ी हो तो किस हद तक दमन किया जा सकता है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी सामने आया है कि मृतक की इतनी बेरहमी से पिटाई हुई थी कि उसकी बड़ी आंत तक फट गई. लेकिन यूपी पुलिस को वह महज़ पेट दर्द दिखाई पड़ा.

जुर्म के खात्मे का दम भरने वाली योगी सरकार बिलकुल विफल साबित हो रही है. अगर कुछ हो रहा है तो बस बयानबाजी. अब सरकार को चाहिए कि वह आगे आकार अपने विधायक पर लगे आरोपों पर कड़ा संज्ञान ले. क्योंकि यह मामला हल्का नहीं. यह मामला किसी की अस्मत से जुड़ा होने के साथ-साथ अब मौत से भी जुड़ गया. कुल मिलाकर अब सरकार को बेटी बचाओ के नारे में एक लाइन और जोड़ देनी चाहिए कि ‘बेटी बचाओ और उसके घर वालों को भी’.