नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सांसदों से संसद की गरिमा बनाए रखने और मजबूत संसदीय निगरानी में सक्रिय योगदान देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इससे राज्यसभा में सूचीबद्ध कार्यों पर सार्थक और प्रभावी चर्चा संभव हो सकेगी।
लोकतंत्र बहस और विविध विचारों से मजबूत होता है
राज्यसभा सत्र की शुरुआत में शून्यकाल के दौरान अपने संबोधन में श्री राधाकृष्णन ने कहा कि लोकतंत्र विविध विचारों और जीवंत बहसों से फलता-फूलता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि संसद में सम्मानजनक संवाद और रचनात्मक चर्चा ही संसदीय परंपरा का आधार होनी चाहिए।
भारत की अर्थव्यवस्था पर गर्व
उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह गर्व की बात है कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका के चलते सांसदों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
बजट और विधायी कार्यों पर होगी गहन चर्चा
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति के दोनों सदनों को संबोधित किए गए भाषण से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की स्पष्ट दिशा तय हुई है। इसके अनुरूप, 30 बैठकों के दौरान राज्यसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 और सरकार के विधायी प्रस्तावों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।
सहयोग की अपील
राज्यसभा सभापति ने सभी संसदीय दलों के नेताओं और सदस्यों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यह सत्र आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होना चाहिए।
