क्या है कृषि क्लस्टर और भारत में कहां तक हैं इसकी संभावनाएं

क्या है कृषि क्लस्टर और भारत में कहां तक हैं इसकी संभावनाएं - Panchayat Times

नई दिल्ली/रांची. हाल ही में भारत सरकार ने कृषि निर्यात नीति-2018 (Agri Export Policy-2018) के तहत आंध्र प्रदेश के अनंतपुर और कडप्पा जिलों को केला क्लस्टर के तौर पर अधिसूचित किया है.

क्या है क्लस्टर आधारित खेती

विकासशील (जैसे भारत, बंगलादेश) देशों में टिकाऊ विकास की सबसे बड़ी संभावना कृषि क्षेत्र में निहित है. यहाँ पर बड़ी संख्या में गरीबी है, तथा किसान छोटे-छोटे पैमाने पर लोग सीमित क्षेत्रों में खेती करते हैं. विकासशील देशों के किसान कम लाभ के “संतुलन के चक्र” से घिरे हैं जहाँ पर सीमित क्षमता और कम निवेश के चलते कम उत्पादकता, बाजारो तक कम पहूंच जैसी परिस्थितियाँ व्याप्त हैं.

क्या होते है क्लस्टर?

“उद्योगों की भौगोलिक (कहां किस स्थान पर स्थित है) विशेषता जो स्थान विशेष की परिस्थितियों के माध्यम से अधिक लाभ प्राप्त करती है” क्लस्टर कहलाती है. क्लस्टर से जुड़े उद्योगों और अन्य संस्थाओं की एक शृंखला होती है जिसमें संबंधित उद्योग घटक, मशीनरी, सेवा और विशेष बुनियादी ढाँचा शामिल होता है. क्लस्टर अक्सर चैनलों के माध्यम से ग्राहकों, कंपनियों के साथ-साथ उद्योग विशेष से संबंधित कौशल एवं प्रौद्योगिकियों के मध्य एकीकृत दृष्टिकोण स्थापित करता है.

भारत में कृषि क्लस्टर :

भारत भौगोलिक, जलवायवीय और मृदा संबंधी विविधता वाले विशाल देशों में से एक है इसीलिये भारत के कृषि स्वरूप में पर्याप्त विविधता है. भारत के विभिन्न क्षेत्र किसी विशेष फसल की कृषि के लिये आदर्श स्थल हैं, उदाहरणस्वरूप गुजरात और महाराष्ट्र में कपास संबंधी आदर्श स्थितियां हैं.

इसी प्रकार किसी फसल विशेष के संबंध में भी स्थानीय विविधता है, जैसे- मूँगे की विभिन्न किस्मों के लिये कर्नाटक, झारखंड और असम में विशेष परिस्थितियाँ पाई जाती हैं. धान की अमन, ओसों जैसी प्रजातियाँ विभिन्न कृषि क्षेत्रों में बेहतर उत्पादन करती हैं.

भारत में कृषि अर्थव्यवस्था के क्षेत्रीकरण संबंधी पूर्व अध्ययनों की जाँच करने के बाद योजना आयोग द्वारा यह सिफारिश की गई थी कि कृषि-आयोजन संबंधी नीतियाँ कृषि-जलवायु क्षेत्रों के आधार पर तैयार की जानी चाहिये. इसी प्रकार संसाधन विकास के लिये देश को कृषि-जलवायु विशेषताओं, विशेष रूप से तापमान और वर्षा सहित मृदा कोटि, जलवायु एवं जल संसाधन उपलब्धता के आधार पर पंद्रह कृषि जलवायु क्षेत्रों में बाँटा गया है.

इस प्रकार भारत की कृषि जलवायु विविधता को देखते हुए भारत में क्लस्टर आधारित कृषि की पर्याप्त संभावनाएँ हैं. इसी परिप्रेक्ष्य में खाद्य और कृषि संगठन द्वारा महाराष्ट्र में क्लस्टर से संबंधित कई विशेषताओं उनकी प्रतिस्पर्द्धा या उनकी कमी के कारणों की समीक्षा की.

कौन देखता है

नई दिल्ली स्थित ओर वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाला कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) भारत में क्लस्टरों को देखता है. इसकी स्थापना भारत सरकार द्वारा कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1985 के अंतर्गत ‘संसाधित खाद्य निर्यात प्रोत्साहन परिषद’ के स्थान पर की गई थी.

भारत में क्या है कृषि क्लस्टर से संभावनाएँ:

वे देश जो अधिक खाद्यान उत्पादन करते हैं, की अपेक्षा भारत में अधिक कृषि क्षेत्र है परंतु भारत में विस्तृत कृषि की कमी के कारण उत्पादन को आशा अनुसार प्राप्त नही किया जा सका है. हरित क्रांति का प्रभाव भी भारत के सीमित क्षेत्रों को ही लाभान्वित कर पाया है, इसी परिप्रेक्ष्य में भारत में विद्यमान सीमांत एवं छोटेे खेतों वाले कृषि क्षेत्र के मध्य क्लस्टर आधारित कृषि की असीम संभावनाएँ हैं.

विभिन्न कृषि क्षेत्रों में आदर्श फसल और उससे संबंधित बुनियादों बातों को ध्यान में रखते हुए विशेष विनियामक रणनीति के माध्यम से कृषको की आय दुगुनी करने संबंधी प्रयोजनों में बेहतर सफलता प्राप्त की जा सकती है. इसके अतिरिक्त भारत में कृषकों की खाद्यान से संबंधित कृषि अवधारणा को व्यावसायिक कृषि में बदल कर स्थानीय प्रवास, रोजगार और स्थानीय व्यवसाय जैसी फारवर्ड एवं बैकवर्ड सुधारों के माध्यम से कृषि पर निर्भर 50% जनसंख्या कि समस्याओं के बेहतर समाधान के साथ-साथ आर्थिक विकास में कृषि की प्रासंगिक भूमिका निभा सकती है क्योंकि भारत अभी भी विकासशील व कृषि प्रधान देश है.

कृषि निर्यात नीति- 2018:

कृषि निर्यात नीति से चाय, कॉफी और चावल जैसे कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ यह वैश्विक कृषि व्यापार में देश की हिस्सेदारी को बढ़ाएगी. कृषि निर्यात नीति, 2018 का उद्देश्य वर्ष 2022 तक कृषि निर्यात को 60 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक करना है.

कृषि निर्यात नीति को दो श्रेणियों में व्यवस्थित किया गया है-

परिचालन 

परिचालन के तहत निम्नलिखित कार्य शामिल होंगे- उत्पादन और प्रसंस्करण में निजी निवेश को आकर्षित करना
मजबूत नियमों की स्थापना
अनुसंधान एवं विकास
विविध

सामरिक 

सामरिक श्रेणी में तहत निम्नलिखित उपाय शामिल होंगे-

नीतिगत उपाय
अवसंरचना एवं रसद समर्थन
निर्यात को बढ़ावा देने के लिये समग्र दृष्टिकोण
कृषि निर्यात में राज्य सरकारों की बड़ी भागीदारी
मूल्य वर्द्धित निर्यात को बढ़ावा देना
ब्रांड इंडिया’ का विपणन और प्रचार