दासडीह पंचायत के मुखिया को पीएम से राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने की वजह क्या है?

नई दिल्ली. कभी साइबर अपराधों के लिए शर्मिदगी झेलने वाली दासडीह पंचायत प्रधानमंत्री दीन दयाल उपाध्याय राष्ट्रीय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार पाने के बाद से एक बार फिर चर्चा में है. पंचायत दिवस के मौके पर यहां के मुखिया हरि मंडल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जबलपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में सम्मानित किया.

झारखंड के गिरिडीह जिले के गांडेय प्रखंड की पंचायत को यह सम्मान ओडीएफ सहित कई मानकों पर खरा उतरने के  लिए दिया गया है. दासडीह पंचायत झारखंड की पहली पंचायत है जो खुले में सबसे पहले शौच से मुक्त हुआ है. जांच टीम ने पंचायत के लिए जारी फंड का सही उपयोग होने से संतुष्ट हुए.

पुरस्कार के लिए गठित टीम ने जॉब कार्डधारी, किसान, ग्रामीण, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से बातचीत के बाद दासडीह पंचायत का चयन किया.

जल संरक्षण के उपायों को अपनाकर पंचायत में वर्षा जल को संग्रहित किया गया. पर्याप्त पानी की उपलब्धता से सब्जी की खेती संभव हो पाई. इससे पंचायत के किसानों की आर्थिक स्थिति भी ठीक हुई है. यहां के लोगों ने पारंपरिक (आर्गेनिक) खेती को अपनाया है.

हालांकि दासडीह पंचायत के मुखिया हरि मंडल यहां की उपलब्धियों को अनोखा काम नहीं मानते हैं. वह कहते हैं, “सिर्फ लगकर सरकार की तमाम महत्वकांक्षी योजनाओं को धरातल पर पहुँचाया है और उनका प्रयास आगे भी जारी रहेगा.”

ओडीएफ के साथ-साथ गांवों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं. स्कूलों में हैंडवॉश बेसिन है और उपयोग किए गए पानी को सोख्ता गड्डा में डालने की व्यवस्था है. इन प्रयासों से भूमिगत जल का स्तर को बनाए रखने के साथ ही गांव के तालाब को भी स्वच्छ रहने में मदद मिली है. वहीं कचरा के निपटारे के लिए वर्मी कंपोस्ट के प्लांट लगाए गए हैं.

मनरेगा से पंचायत में 15 सिंचाई कूप और पीने के लिए 25 चापाकल सहित आधारभूत ढ़ांचा विकसित करने में मदद मिली है. पंचायत में मोमबत्ती, पापड़, अचार सहित कई कुटिर उद्योग हैं. जिसे यहां की महिलाएं स्वयं सेवी समूह बनाकर चलाती हैं.

दासडीह के युवा मुखिया हरि मंडल बताते हैं कि साइबर अपराध के आरोप में पहले यहां के युवाओं को अक्सर पुलिस पकड़कर ले जाती थी. इससे बड़ी शर्मिंदगी होती थी. इससे निजात पाने के लिए आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया. इसका असर हुआ है, आज पुलिस गांव में नहीं आती है.

अब पंचायत में खुशहाली है. हरियाली यहां पहुंचने वाले लोगों का स्वागत करती है.