पाकिस्तान चुनाव में कहां हैं भारत से गए लोग

नई दिल्ली. भारत में जहां 17वीं लोकसभा के आम चुनाव की आहट सुनाई देने लगी है, वहीं हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में आम चुनाव 2018 के लिए कल 25 जुलाई, बुधवार को को वोट डाले जाएंगे. पाकिस्तान की 15वीं संसद के लिए पाकिस्तान नेशनल असेंबली की कुल 342 सीटें में से 272 सीटों और पाकिस्तान के चार सूबों की विधानसभाओं के के लिए इस दिन मतदान होगा लेकिन ऐसा पहली बार है जब बंटवारे के बाद भारत से पाकिस्तान गए लोगों में चुनाव को लेकर निराशा है.

पाकिस्तान के अभी तक के हर चुनाव में मोहाजिरों ( मोहाजिर उन ऊर्दू-भाषी मुसलमान को पुकारा जाता है, जो विभाजन के समय साल 1947 में भारत से पाकिस्तान आकर बस गए थे.) का बड़ा रोल रहा है. पाकिस्तान की संसद जिसको नेशनल असेंबली कहा जाता है, यह लोग चुने जाते रहे हैं लेकिन इस पाकिस्तान पार्लियामेंट में नुमाइंदी घटने का अनुमान है.

पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में तो 40 से लेकर 45 प्रतिशत तक मोहाजिरों की आबादी है. शहरी और कारेबार से संपन्न समझे जाने वाले माहोजिरों पर भारत की अमिट छाप है. पिछले कई दशक से भारत की एजेंट या समर्थक का आरोप झेलने वाली मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) और उसके नेता अल्ताफ़ हुसैन का कराची पर दबदबा रहा है.

कराची शहर की 20 नेशनल असेंबली की सीटें (भारत में लोकसभा क्षेत्र की तरफ पाकिस्तान में नेशनल असेंबली का हल्का यानि क्षेत्र होता है. भारत में संसद की लोकसभा के लिए चुन हुए लोगों को सांसद कहते हैं और पाकिस्तान में मेंबर ऑफ नेशनल असेंबली यानि एमएनए ) में से अधिकतर पर मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट को जीत मिलती थी. लेकिन ऐसा पहली बार सिंध की दूसरी सबसे बड़ी और पाकिसस्तान की चौबी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट के सितारे गर्दिश में हैं.

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इस बार के चुनाव में इस पार्टी का बंटवारा हो चुका है. इस पार्टी के सुप्रीमो और 1992 से ही वे लंदन से अपनी पार्टी का संचालन करते आ रहे अल्ताफ हुसैन लंदन में स्व-निर्वासित जीवन बिताते हुए चुप बैठ गए हैं, वहीं उनके साथी नेताओं ने अलग-अलग पार्टी बना ली है. कभी अल्ताफ हुसैन के खास रहे और और मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट की बदौलत कराची के मेयर बनने वाले मुस्तफा कमाल ने इस चुनाव में ” पाक सरजमीं पार्टी ” PSP बनाकर डॉल्फिन चुनाव चिन्ह के जरिए ताल ठोक रहे हैं, वहीं अल्ताफ हुसैन के कभी दायां हाथ माने जाने वाले डॉ. फारुख सत्तार ने दो साल पहले अल्ताफ हुसैन से अलग होकर मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट पाकिस्तान नाम से अलग पार्टी बना ली.

कभी मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट का टीवी चेहरा माने जाने वाले टीवी प्रजेंटेटर, पत्रकार और एंकर पर्सन आमिर लिकायत हुसैन भी मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट को छोड़कर इस चुनाव में इमरान खान की पार्टी पीटीआई में शामिल होकर कराची से चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसे में पाकिस्तान के चुनावी इतिहास में ऐसा पहली बार है जब मोहाजिरों के सामने कंफ्यूजन की स्थिति है. कुछ दिन पहले की पाकिस्तान की दुनिया टीवी के नेशनल सिक्योरिटी कॉरस्पांडेंट वजाहत सईद खान ने कराची के मोहाजिरों को लेकर एक रिपोर्ट दिखाई थी, जिसमें बताया गया था कि मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट के बंटवारे से सबसे ज्यादा फायदे में इमरान खान है. वैसे इसका पता तो कल के चुनाव के बाद लगेगा.