विधानसभा चुनाव में कहां खड़ी हैं राजस्थान की महिलाएं

विधानसभा चुनाव में कहां खड़ी हैं राजस्थान की महिलाएं -Panchayat Times
प्रतीक चित्र

जयपुर. राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन भरने का काम सोमवार को पूरा हो गया. राजस्थान विधानसभा की कुल 200 सीटों के लिए 3246 प्रत्याशियों ने अपना पर्चा भरा है. ऐसे में हर बार की तरह यह जानना जरूरी है कि महिला सशक्तीकरण को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करने वाले राजनीतिक दलों ने इस चुनाव में कितनी महिलाओं को चुनाव लड़ने का मौका दिया है.

बात अगर सत्तारुढ़ बीजेपी की करें तो इस चुनाव में पार्टी ने 23 महिलाओं को टिकट दिया है. वहीं कांग्रेस ने इस बार 27 महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारा है. इस बार के चुनाव में कांग्रेस ने तीन मुस्लिम महिलाओं पर भी अपना भरोसा जताया है वहीं बीजेपी ने एक भी मुस्लिम महिला को टिकट नहीं दिया है.

पिछली बार के मुकाबले इस बार ज्यादा महिलाओं को टिकट

पांच साल पहले हुए 2013 के राजस्थान विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार कांग्रेस ने ज्यादा महिलाओं को चुनाव लड़ने का मौका दे रही है. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 200 सीटों में से 23 पर महिलाओं को टिकट दिया था. लेकिन, इस बार उसने 200 सीटों में से 27 सीटें पर महिलाओं को  टिकट दिया है. यानि पिछली बार से चार ज्यादा. अगर भाजपा के टिकट बंटवारे को देखें तो भाजपा ने 2013 में जहां 25 महिलाओं को टिकट दिया था. वहीं इस बार यह संख्या दो कम यानी 23 है.

यह हैं कांग्रेस की प्रमुख महिला उम्मीदवार

कांग्रेस की प्रमुख महिला उम्मीदवारों में उदयपुर से गिरिजा व्यास, कामां से जाहिदा खान, मालवीय नगर से अर्चना शर्मा, रायसिंहनगर से सोनादेवी बावरी, संगरिया से शबनम गोदारा, सादुलपुर से कृष्णा पूनिया, बगरू से गंगादेवी, बामनवास से इंदिरा मीणा और ओसियां से दिव्या मदेरणा शामिल हैं.

वहीं भाजपा की प्रमुख महिला उम्मीदवारों में बीकानेर पूर्व से सिद्धि कुमारी, कोलायत से पूनम कंवर, नदबई से कृष्णेंद्र कौर, सपोटरा से गोलमा देवी, अजमेर दक्षिण से अनिता भदेल, सूरसागर से सूर्यकांता व्यास और राजसमंद से किरण व्यास शामिल हैं.

कांग्रेस की मुस्लिम प्रत्याशियों में जो तीन नाम है उसमें जाहिदा, साफिया (रामगढ़) और गुलनेज (लाडपुरा) शामिल हैं. रोचक बात यह है कि 2013 में साफिया और गुलनेज के पति उनकी सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी थे. इस तरह से कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशियों में सात नए चेहरे हैं. कांग्रेस इस बार 195 सीटों पर चुनाव लड़ रही है उसने पांच सीटें गठबंधन की पाटियों के लिए छोड़ी है.

2013 में चुनी गईं थी 28 महिला विधायक 

2013 के विधानसभा चुनाव में केवल 28 महिला प्रत्याशी ही चुनाव जीत पाई थीं. इनमें से एक का निधन हो गया और एक सांसद बन गईं, जिससे कुल महिला विधायकों की संख्या घटकर 26 रह गई थी. हालांकि, इसके बाद जब धौलपुर सीट के बसपा विधायक बीएल कुशवाहा को 2016 में कत्ल की साजिश रचने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई गई तो यहां उपचुनाव हुआ. उपचुनाव में कुशवाहा की पत्नी शोभारानी ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत गईं. इस तरह विधानसभा में महिलाओं की संख्या बढ़कर 27 हो गई थी.

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राजस्थान में विधानसभा सदस्यों की कुल संख्या 200 है, जिनमें से महज 27 महिलाएं हैं यानी महज 13 फीसदी सीटों पर महिला विधायक थी. इनमें में राज्य के 14 जिले ऐसे हैं, जहां से एक भी महिला विधायक निर्वाचित नहीं हो पाई थींं.

पिछले चुनाव में इन जिलों से चुनी गईं थी महिला विधायक

राजस्थान में कुल 33 जिले हैं, जिनमें से 19 के विधानसभा क्षेत्रों से महिलाएं चुनकर आई थी. इन जिलों में श्रीगंगानगर, धौलपुर, अजमेर, अलवर, भरतपुर, दौसा व जोधपुर से 2-2 महिला विधायक चुनी गईं थी. जबकि सवाई माधोपुर, राजसमंद, पाली, नागौर, कोटा, करौली, झालावाड़, जालौर, जयपुर, हनुमानगढ़, डूंगरपुर व बीकानेर जिले से 1-1 महिला विधायक बनी थी. इनमें भी सबसे ऊपर श्रीगंगानगर है, जहां की कुल 6 सीटों में से 3 पर महिला प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी.

वसुंधरा कैबिनेट मंत्री में सिर्फ एक महिला मंत्री

वसुंधरा सरकार में कुल 17 कैबिनेट मंत्री हैं, जिनमें सिर्फ एक महिला है. किरण माहेश्वरी को राजे ने अपनी कैबिनेट का हिस्सा बनाया था. जबकि राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार की बात की जाए तो उसमें कृष्णेन्द्र कौर और अनिता भदेल को जगह दी गई. एक और महिला विधायक कामसा को राज्य मंत्री बनाया गया है. यानी वसुंधरा के साथ सरकार चलाने के लिए सिर्फ चार महिला मंत्री हैं.

नहीं पूरा हो रहा है 33 प्रतिशत का कोटा

महिलाओं की संसद और विधानसभा में पर्याप्त हिस्सेदारी के लिए लंबे समय से 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए आंदोलन हो रहा है लेकिन लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी महिलाओं की यह मांग अधूरी है. अगर आंकड़ों के लिहाज से देखें तो 33 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब ने राजस्थान विधानसभा की कुल 200 सीटों में से 66 सीटें महिलाओं को लिए आरक्षित होनी चाहिए. साथ ही विभिन्न पार्टियों की तरफ से कम से कम 66 टिकट तो महिलाओं को मिलनी चाहिए. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए 7 दिसंबर को मतदान होगा और 11 दिसंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे.