नई दिल्ली: देश आज 77वां गणतंत्र दिवस 2026 पूरे गर्व, देशभक्ति और उल्लास के साथ मना रहा है। यह दिन न केवल राष्ट्रीय उत्सव है, बल्कि 26 जनवरी 1950 को लागू हुए भारतीय संविधान को स्मरण करने का अवसर भी है, जिसने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाया। भारत ने अपना पहला गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1951 को मनाया था।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत ने 15 अगस्त 1947 को आज़ादी पाई, लेकिन 26 जनवरी 1950 से देश ने अपने स्वयं के संवैधानिक ढांचे के तहत शासन करना शुरू किया। हर साल इस अवसर पर कर्तव्य पथ पर भव्य गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन होता है, जिसमें भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रदर्शन किया जाता है।
इस वर्ष गणतंत्र दिवस 2026 की थीम ‘वंदे मातरम्’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर आधारित है। इस खास मौके पर आइए जानते हैं उन महान विभूतियों के बारे में, जिन्होंने भारतीय संविधान का मसौदा तैयार किया।
भारतीय संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी
29 अगस्त 1947 को गठित भारतीय संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी में कुल सात सदस्य शामिल थे। इस समिति की जिम्मेदारी संविधान का प्रारूप तैयार करना था। समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे।
ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य
डॉ. भीमराव अंबेडकर (अध्यक्ष)
बाबासाहेब के नाम से प्रसिद्ध डॉ. अंबेडकर भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार माने जाते हैं। वे प्रख्यात विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री और समाज सुधारक थे। उन्होंने अस्पृश्यता के उन्मूलन और समान अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया। संविधान में मौलिक अधिकारों और समानता के प्रावधानों में उनकी भूमिका निर्णायक रही।
एन. गोपालस्वामी अय्यंगार
सर एन. गोपालस्वामी अय्यंगार भारतीय प्रशासन के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। वे संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य थे और अनुच्छेद 370 के प्रारूपकार के रूप में विशेष रूप से जाने जाते हैं।
अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर
अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर एक प्रसिद्ध वकील और संविधान के प्रमुख वास्तुकारों में शामिल थे। डॉ. अंबेडकर ने उनकी विद्वत्ता की सराहना की थी। वे संविधान के प्रारूप की जांच करने वाली विशेष समिति के अध्यक्ष भी रहे।
डॉ. के. एम. मुंशी
कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी एक बहुआयामी व्यक्तित्व थे—राजनेता, लेखक और शिक्षाविद। उन्होंने भारतीय विद्या भवन की स्थापना की। संविधान में मौलिक अधिकारों और न्यायपालिका से जुड़े प्रावधानों में उनकी अहम भूमिका रही।
सैयद मोहम्मद सादुल्ला
असम के पहले प्रधानमंत्री रहे सैयद मोहम्मद सादुल्ला ड्राफ्टिंग कमेटी के एकमात्र पूर्वोत्तर भारत से सदस्य और मुस्लिम लीग के प्रतिनिधि थे। उन्होंने संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
बी. एल. मिटर
ब्रोजेंद्र लाल मिटर संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के मूल सदस्यों में शामिल थे। स्वास्थ्य कारणों से वे समिति से अलग हो गए, जिसके बाद उनकी जगह एन. माधव राव को शामिल किया गया।
डी. पी. खेतान
देबी प्रसाद खेतान एक प्रख्यात वकील और संविधान समिति के सदस्य थे। वे खैतान एंड कंपनी लॉ फर्म के सह-संस्थापक थे। 1948 में उनके निधन के बाद उनकी जगह टी. टी. कृष्णमाचारी को समिति में शामिल किया गया।
ड्राफ्टिंग कमेटी ने व्यापक चर्चाओं और सुझावों के बाद फरवरी 1948 में संविधान का मसौदा तैयार किया, जो आगे चलकर आधुनिक भारत की लोकतांत्रिक नींव बना।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश उन सभी महान संविधान निर्माताओं को नमन करता है, जिनकी दूरदृष्टि और परिश्रम से भारत को उसका मजबूत संविधान मिला।
