विवादों में क्यों है शिमला की 110 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत

विवादों में क्यों है शिमला की 110 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत

शिमला/नई दिल्ली. शिमला शहर की पहचान ऐतिहासिक शिमला टाउन हाल के मालिकाना हक को लेकर मामला सुलझता नजर नहीं आ रहा है. लगभग आठ करोड़ रुपए की लागत से नए स्वरूप में आई इमारत पर किसका हक होगा इसका फैसला आने वाले साल 3 जनवरी को सुनाया जाएगा. हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को टाउन हाल के संबंध में किसी निर्णय पर पहुंचने का समय दिया है.

गुरुवार को हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत व न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि 3 जनवरी 2019 तक टाउन हाल को लेकर काम्प्रेंहैंसिव प्लान अदालत में पेश किया जाए.

अदालत में राज्य सरकार की तरफ से समय की मांग की गई थी, जिस पर 3 जनवरी तक का वक्त मिला है. टाउन हाल को नगर निगम को सौंपा जाना है या फिर किसी अन्य विभाग या संस्था को उपयोग करने के लिए दिया जाना है, इस बारे में विस्तृत प्लान अदालत को सौंपना होगा. शिमला शहर की जनता व नगर निगम प्रशासन की निगाहें हाईकोर्ट में सरकार के जवाब पर टिकी थीं लेकिन फैसला टल गया है.

इस ऐतिहासिक इमारत को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं. नगर निगम शिमला किसी भी कीमत पर इसका मालिकाना हक नहीं छोड़ना चाहता. वहीं, पर्यटन विभाग व जिला प्रशासन भी इस पर नजरें गड़ाए हुए हैं. मेयर व पार्षद इस मामले में कई बार सीएम जयराम ठाकुर से मिल चुके हैं.

 

स्कॉलटलैंड के आर्किटेक्ट ने किया था डिजाइन

110 साल पुरानी इस इमारत का निर्माण 1908 में किया गया था. इसका डिजाइन स्कॉलटलैंड के आर्किटेक्ट जेम्स रेंजैम ने किया था. लेकिन रख-रखाव नहीं और शिमला नगर निगम की अनदेखी के चलते यह भवन जर्जर हो गया था. इस भवन को 8 करोड़ 2 लाख रुपए के खर्च से जीर्णोद्वार किया गया है. टाउन हाल के जीर्णोद्वार का शिलान्यास 24 जून 2014 किया गया था. इसका हाल ही में काम पूरा हुआ है और 29 नवंबर को मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने इसका उद्घाटन किया.

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