आखिर क्यों विवाद मचा है तीन मूर्ति भवन को लेकर

आखिर क्यों विवाद मचा है तीन मूर्ति भवन को लेकर

नई दिल्ली. देश की आजादी से पहले और बाद में अनेकों घटनाओं का जीवंत गवाह तीन मूर्ति भवन को लेकर केन्द्र की बीजेपी सरकार और कांग्रेस में आमने-सामने हैं. एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तीन मूर्ति भवन में देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों की याद में संग्रहालय बनाने की योजना बना रहे हैं वहीं कांग्रेस पार्टी देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की याद में बनाए गए इस भवन के नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय में किसी भी प्रकार के छेड़छाड़ का विरोध कर रही है.

ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि आखिर तीन मूर्ति इतना क्यों खास है कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताते हुए मोदी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं.

16 वर्ष तक इसी भवन में रहे पंडित जवाहर लाल नेहरू:

नेहरु स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय की वेबसाइट नेहरु पोर्टल के अनुसार सन् 1946 में जवाहरलाल नेहरू जब वायसराय की कार्यकारिणी परिषद् के उपाध्यक्ष थे, 17 यॉर्क रोड, नई दिल्ली में रहते थे. जिसे आज मोतीलाल नेहरू रोड के नाम से जाना जाता है. यह स्थान भारत की स्वतंत्रता से संबंधित वार्ता के दौरान और उसके बाद भी कुछ समय के लिए मुख्यालय के रूप में प्रयोग किया गया. स्वतंत्र भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद पं.जवाहर लाल नेहरू 2 अगस्त 1948 को तीन मूर्ति भवन में आ गए जोकि प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास स्थान बन गया.

तीन मूर्ति भवन में पंडित जवाहर लाल नेहरू

जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री बनने से लेकर अपने निधन 27 मई, 1964 तक यानि 16 वर्ष तक इस भवन में रहे. ऐसे में यह भवन जवाहरलाल नेहरू के नाम से ऐसा जुड़ा कि उनके नाम का पर्याय बन गया. नेहरू की मृत्यु के बाद नेहरू की स्मृति एवं विरासत को स्थायी बनाने के लिए भारत सरकार ने तीन मूर्ति भवन को स्मारक के रूप में परिवर्तित करने का निर्णय लिया. 14 नवम्बर 1964 को जवाहरलाल नेहरू के 75वें जन्मदिवस पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन ने तीन मूर्ति भवन में संग्रहालय एवं पुस्तकालय स्थापित करने के लिए राष्ट्र को औपचारिक रूप से समर्पित किया जिसे वर्तमान में नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय के नाम से जाना जाता है.

तीन सैनिकों के नाम पर है तीन मूर्ति भवन:

तीन मूर्ति भवन, नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के दक्षिण में स्थित है. तीन मूर्ति भवन भवन एक चौराहे से लगा हुआ है, जहाँ तीन मूर्ति मार्ग, साउथ एवेन्यु मार्ग एवं मदर टेरेसा क्रीज़ेन्ट मार्ग मिलते हैं. इसका नामकरण तीन सैनिकों की मूर्ति समूह से हुआ जोकि मैसूर, जोधपुर एवं हैदराबाद राज्य के शस्त्रधारकों का प्रतिनिधित्व करते हैं. 1922 में इस स्मारक का निर्माण सिनाय, फिलीस्तीन एवं सीरिया में प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान शहीद हुए भारतीय राज्यों के सैनिकों की स्मृति में किया गया.

तीन मूर्ति भवन का गलियारा

एडविन लुटियन की शाही राजधानी के एक भाग के रूप में, रॉबर्ट टोर रसल द्वारा डिजाईन किए गए तीन मूर्ति भवन का ब्रिटिश इंडियन आर्मी के कमाण्डर-इन-चीफ के आधिकारिक निवास के रूप में 1929-30 में निर्माण किया गया. पहले ये मूल भवन भारत में ब्रिटिश सेना के कमांडर-इन-चीफ़ का आवास हुआ करता था, जिसे फ़्लैग-स्टाफ़ हाउस कहते थे. यह ऑस्ट्योर क्लासिक शैली में निर्मित है. इस शैली का दूसरा भवन दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस है.

यह भव्य भवन साधारण रूप से उत्कृष्ट शैली में बनाया गया तथा इसकी संरचना के दौरान यह ध्यान रखा गया कि इसमें सैन्य कौशल का प्रतिबिम्ब परिलक्षित हो. फील्ड मार्शल सर विलियम बर्डवुड इस भवन में रहने वाले प्रथम व्यक्ति थे तथा जनरल सर रॉय बुचर यहां पर रहने वाले अंतिम व्यक्ति थे जिन्‍होंने 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् इसे खाली कर दिया.

तीन मूर्ति भवन की गैलरी में लगी पंडित जवाहर लाल नेहरू की तस्वीर

इतिहास का साक्षी है तीन मूर्ति भवन:

तीन मूर्ति भवन में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू की स्मृति में एक संग्रहालय बना है. जहां उनके जीवन की झलक आज भी यहाँ उनके छाया-चित्रों में देखी जा सकती है. सीढ़ीनुमा गुलाब उद्यान एवं एक दूरबीन यहां के प्रमुख आकर्षण हैं. इसी गुलाब उद्यान से नेहरु जी अपनी शेरवानी का गुलाब चुना करते थे. यहाँ हर शाम ध्वनि एवं प्रकाश कार्यक्रम का आयोजन भी होता है ट्रिस्ट विद डेस्टिनी जिसमें उनके जीवन और स्वतंत्रता के इतिहास के बारे में बताया जाता है.

तीन मूर्ति भवन की गैलरी

नेहरु जी के जीवन से संबंधित बहुत सी वस्तुएं यहां संरक्षित रखी हुई हैं. इतिहास के साक्षी बहुत से समाचार पत्र, जिनमें ऐतिहासिक समाचार छपे हैं, उनकी प्रतियां, या छायाचित्र भी यहां सुरक्षित हैं. इन सबके साथ ही पंडित नेहरू को मिला भारत रत्न भी प्रदर्शन के लिए रखा हुआ है.

तीन मूर्ति भवन के परिसर में ही नेहरू तारामंडल बना है. यहां ब्रह्मांड, तारों, सितारों और खगोलीय घटनाओं को वैज्ञानिक तकनीक से एक अर्ध-गोलाकार छत रूपी पर्दे पर देखा जा सकता है. भारत के अन्य शहरों के तारामंडलों की अपेक्षा इस तारामंडल में बहुत ज्यादा सुविधाएं नहीं हैं तो भी वह लोगों को इस रहस्यमय दुनिया की झलक दिखाता है. नेहरू तारामंडल की कल्पना एवं योजना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बनाई थी. वे चाहती थीं कि बच्चों में विज्ञान को बढ़ावा दिया जाए.

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का कमरा

तारामंडल बनने से पहले यहां एक टेनिस कोर्ट हुआ करता था, जहां कभी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और उनके भाई संजय गांधी अपनी किशोरावस्था में टेनिस खेला करते थे. तारामंडल की इमारत पत्थरों से बनी है जो पास ही बनी दूसरी ऐतिहासिक रचनाओं जैसी मुगलकालीन बनावट से एकरूपता रखती है.