बिहार चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी में क्यों हो रही है भीतरी कलह

बिहार चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी में क्यों हो रहा है भीतरी कलह

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 खत्म हो चुका है लेकिन यह चुनाव कांग्रेस पार्टी को हार के गहरे जख्म दे गया है. महागठबंधन की दूसरी सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा. जिसके चलते पार्टी में भीतरी कलह की चिंगारी को हवा मिल रही है.

कांग्रेस पार्टी महागठबंधन में 70 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी, जिसमें से पार्टी को सिर्फ 19 सीटों पर जीत हासिल हुई. पार्टी के इस प्रदर्शन से नाराज कुछ वरिष्ठ नेताओं ने आत्ममंथन की गुहार लगाई. जिनमें कपिल सिब्‍बल, पी चिदंबरम, विवेक तनखा जैसे नेताओं का नाम शामिल है.

अहमद पटेल की कमी

चिदंबरम, सिब्‍बल और तनखा जैसे नेता एक प्रभावी पार्टी मैनेजर की कमी को लेकर आवाज उठा रहे हैं. कांग्रेस पार्टी में यह भूमिका निभाने वाले अहमद पटेल की तबियत एक महीने से खराब है. वे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती है. रशीद के अनुसार, विद्रोह करने वाले नेता खुद को उस भूमिका में देखना चाहते हैं.

इसके साथ ही पटेल की कमी के कारण कांग्रेस पार्टी सुस्त हो गयी है कांग्रेस के भीतर अहमद पटेल की बेहद अहम भूमिका है. सोनिया या राहुल गांधी से बात करने के लिए पटेल से होकर जाना पड़ता है. चाहे गठबंधन करना हो या अन्‍य विपक्षी दलों के नेताओं से बात करनी हो, पटेल को ही आगे किया जाता है. जब से पटेल अस्‍पताल में भर्ती हुए हैं, कांग्रेस पार्टी में फैसले लेने की रफ्तार धीमी हो गई है.