नई दिल्ली. इस महीने की शुरुआत में केंद्र सरकार के उच्च स्तर पर एक अहम बैठक हुई, जिसमें राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के लिए राष्ट्रीय गान जन गण मन की तरह नियम और प्रोटोकॉल तय करने पर विचार-विमर्श किया गया। यह बैठक गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा बुलाई गई थी, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि वंदे मातरम् कब और किन परिस्थितियों में गाया जाए, क्या इसे राष्ट्रीय गान के साथ गाया जाना चाहिए, और क्या इसके अपमान पर दंड का प्रावधान होना चाहिए।
राष्ट्रीय गान को संविधान और कानून के तहत स्पष्ट संरक्षण प्राप्त है
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् स्वदेशी आंदोलन (1905–08) के दौरान स्वतंत्रता संग्राम का नारा बना। संविधान सभा ने इसे राष्ट्रीय गान के समान सम्मान दिया, लेकिन अब तक इसके गायन को लेकर कोई अनिवार्य शिष्टाचार, मुद्रा या कानूनी बाध्यता तय नहीं है। इसके विपरीत, राष्ट्रीय गान को संविधान और कानून के तहत स्पष्ट संरक्षण प्राप्त है।
सरकार के भीतर चल रही यह कवायद सत्तारूढ़ भाजपा के उस रुख से जुड़ी बताई जा रही है, जिसमें वह वंदे मातरम् के गौरव को “ऊंचा उठाने” की बात करती है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस ने 1937 के कांग्रेस अधिवेशन में गीत की कुछ पंक्तियां हटाकर इसके महत्व को कम किया। इसी बीच, केंद्र ने वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर चार चरणों में सालभर चलने वाले समारोह की शुरुआत भी की है—पहला चरण नवंबर में पूरा हो चुका है, दूसरा इस महीने, तीसरा अगस्त 2026 और चौथा नवंबर 2026 में प्रस्तावित है।
पिछले कुछ वर्षों में अदालतों में कई याचिकाएं दाखिल हुई हैं, जिनमें राष्ट्रीय गीत के गायन के लिए स्पष्ट ढांचा तय करने और Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 के तहत दंड लागू करने की मांग की गई है। 2022 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि जहां राष्ट्रीय गान के अपमान पर दंड का प्रावधान है, वहीं राष्ट्रीय गीत के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं बनाया गया है और न ही इसके गायन को लेकर अब तक कोई निर्देश जारी हुए हैं।
वंदे मातरम् को लेकर बहस
राजनीतिक स्तर पर भी वंदे मातरम् को लेकर बहस तेज रही है। संसद के शीतकालीन सत्र में गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर वंदे मातरम् की महिमा दबाने का आरोप लगाया था, जबकि कांग्रेस ने भाजपा पर इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया।
