चीड़ की पत्तियों से महिलाऐं बना रही पैसा

चीड़ की पत्तियों से महिलाऐं बना रही पैसा-Panchayat Times
साभार इंटरनेट

सोलन. हिमाचल के जंगलों की सबसे बड़ी दुश्मन है चीड़ की पत्तियां. गर्मियों में यह पत्तियां जंगलों में बारुद का काम करती है एक और जहां हमारी अनमोल प्रकृतिक वन संपदा को जला कर तबाह कर देती है. वहीं जंगली जानवरों का भी विनाश का कारण बनती है. यह पत्तियां जब एक बार आग पकड़ लेती है तो वह कई दिनों तक सुलगती रहती है.

दमकल कर्मचारी भी इस आग को बुझाने में कामयाब नहीं हो पाते. इन पत्तियों को विभिन्न उपयोगों में लाने के लिए कई बार कोशिशे हो चुकी है लेकिन इस बार सोलन की  महि पंचायत की महिलाओं ने इन पत्तियों से पैसा बनाना आरम्भ कर दिया है और ऐसा ईलाज ढूंढ लिया है. उससे न जंगलों में आग लगेगी और न ही अरबों रुपए के जंगल आग की भेंट चढ़गे यही नहीं  बल्कि महिलाओं को घर बैठे बगैर लागत से आमदनी भी होगी.

माहि पंचायत की महिलाओं ने कुछ अलग करने की सोची और तह किया कि वह एसा काम करेंगे. जिससे पर्यावरण भी सुरक्षित हो और उनकी आमदनी का जरिया भी बने इस काम में हिमाचल के पर्यटन विभाग ने महिलाओं की बात को समझा और उनका मार्ग दर्शन किया. महिलाओं को चीड़ की पत्तियों से बर्तन बनाने का नया आईडिया दिया. जिसमें महिलाओं ने चपाती बॉक्स ,कोस्टर ट्रे , फ्रूट बकेट और अन्य सजावटी सामान बनाना आरम्भ किया.
महिलाओं की मदद के लिए पर्यटन विभाग ने उनका सामान अपने होटल्स में बिक्री के लिए उपलब्ध करवाए और यह प्रोडक्ट लोगों को इतने पसंद आए कि हाथो हाथ बिकने लगे. आज इन उत्पादों की मांग इतनी बढ़ चुकी है कि महिलाऐं बेहद खुश है क्योंकि उनकी ओर बनाए गए उत्पादों में कच्चा माल न के बराबर लगता है जो कच्चा माल चाहिए वह जंगलों में फ्री में मिल रहा है और जंगलों की सबसे बड़ी दुश्मन यह पत्तियां भी महि पंचायत से गायब होने लग गई है जिस से जंगलों में आग लगने का डर भी खत्म हो गया है न कमाल की बात .
पर्यटन विभाग के अधिकारी पियूष ने बताया कि उनका विभाग लगातार महिलाओं को प्रशिक्षण दे रहा है और इस से महिलाऐं जहां एक और स्वाबलम्बी हो रही है. वहीं हिमाचल की वन सम्पदा भी जलने से बच रही है. महिलाओं की ओर से बनाए गए उत्पाद पर्यटन विभाग के होटल्स में उपलब्ध है और उनकी इतनी मांग है कि वह हाथों हाथ निकल रहे है. यही वजह है कि कुछ ही महीनों में महिलाओं ने साड़े तीन लाख के उत्पाद बेचने में कामयाबी हासिल कर ली है. जिसके चलते सरकार  उन्हें कई बार सम्मानित भी कर चुकी है.
वहीं महिलाओं ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह अपने पांव पर खड़ा होना चाहती थी और पर्यटन विभाग ने उनका यह सपना भी पूरा कर दिया. आज वह घर का खर्चा इन्ही उत्पादों को बेच कर चला रही है और वह बेहद खुश है. इस व्यवसाय के लिए उन्हें घर से बाहर भी जाना नहीं पड़ता और घर बैठ कर ही वह अपना उद्योग चला रही है.  उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वह हिमाचल की वन सम्पदा को भी बचाने का काम कर रही हैं.
माध्यमPT DESK
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