कहां खड़ी हैं हिमाचली महिलाएं, सरकार की कोशिशें कितनी रंग लाईं

हिमचाल की जयराम सरकार ने भी महिलाओं के उत्थान के लिए कई वादे किए थे
प्रतीक चित्र

शिमला. महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के बिना राज्य की उन्नति और खुशहाली की कल्पना नहीं की जा सकती. हिमचाल की जयराम सरकार ने भी महिलाओं के उत्थान के लिए कई वादें किए थे. कई मामलों में उन्होंने कारगर काम किए हैं. वहीं अब भी बहुत कुछ करना बाकी है. राज्य सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से अनेक कदम उठाए हैं. राज्य की बागडोर संभालते ही सबसे पहले सरकार ने गुड़िया हेल्पलाइन और शक्ति बटन ऐप की शुरूआत की. राज्य में गुड़िया सक्षम बोर्ड का गठन किया गया. महिला शक्ति केन्द्रों की स्थापना की गई. महिलाओं के सशक्तिकरण एवं उनकी सुरक्षा के लिए नीतियों बारे सुझाव देने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में महिला कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन किया गया है.

गुड़िया हेल्पलाइन

शक्ति बटन ऐप तथा गुड़िया हेल्पलाइन महिलाओं के विरूद्ध हिंसा और अपराध पर अंकुश लगाने की दिशा में वरदान साबित हो रही हैं. शक्ति बटन ऐप के तहत अभी तक 28,968 शिकायतों का निवारण किया गया है जबकि गुड़िया हेल्पलाइन के अन्तर्गत प्राप्त कुल 1233 शिकायतों में से 1196 का निपटारा किया गया है.

महिला एवं समाज कल्याण विभाग के माध्यम से महिलाओं के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं. मुख्यमंत्री ने चालू वित्त वर्ष के बजट में ‘सशक्त महिला योजना’ की घोषणा की है. योजना के अन्तर्गत महिलाओं को पंचायत स्तर पर संगठित करके उनके अधिकारों के प्रति उन्हें जागरुक करना, सरकार द्वारा ग्रामिण महिलाओं के उत्थान के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे अवगत करवाकर महिलाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण देकर आत्म निर्भर बनाना है. ‘सशक्त महिला योजना’ किशोरियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करेगी तथा उन्हें मासिक धर्म, स्वच्छता और आत्म सम्मान बढ़ाने के विषयों पर भी जागरुक करेगी. सशक्त महिला योजना के अन्तर्गत सभी किशोरियां जिनकी आयु 11 से 18 वर्ष तथा सभी महिलांए जिनकी आयु 19 से 45 वर्ष है को इस योजना में शामिल किया गया है.

 हिमचाल की जयराम सरकार ने भी महिलाओं के उत्थान के लिए कई वादे किए थे
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कौशल विकास प्रशिक्षण

‘सशक्त महिला योजना’ के अन्तर्गत हर पंचायत मे सशक्त महिला केन्द्र बनाये जाएगें, जिनका संचालन 19 से 45 वर्ष की आयु की महिलाएं करेंगी. यह केन्द्र महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे अवगत करवाएंगे तथा महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के लिए बैंक से जोड़ेंगे और साथ ही कौशल विकास प्रशिक्षण भी प्रदान करेंगे. महिलाओं द्वारा बनाये गए सामान की बिक्री बढ़ाने के लिए महिलाओं को पर्यटन विभाग, मंदिर न्यास तथा उद्योग विभाग से जोड़ा जाएगा.

गर्भवती महिला

केन्द्रीय प्रायोजित योजना ‘प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना’ का राज्य में प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है. योजना के तहत मजदूरी की क्षति के बदले में नकद राशि को प्रोत्साहन के रूप मे आंशिक क्षतिपूर्ति प्रदान करना है ताकि महिलाएं पहले जीवित बच्चे के जन्म से पहले और बाद में पर्याप्त आराम कर सकें. प्रदान की गई नकद प्रोत्साहन राशि से गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं में स्वस्थ रहने के आचरण में सुधार होगा. ऐसी गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं को छोड़कर जो केन्द्र सरकार या राज्य सरकार या सार्वजनिक उपक्रमों के साथ नियमित रोजगार में हैं या जो वर्तमान मे लागू किसी कानून के अर्न्तगत समान लाभ प्राप्त कर रही हैं, सभी गर्भवती महिलाएं एवं स्तनपान कराने वाली माताएं जो पहली बार मां बनी हैं या बनने जा रही हैं, योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगी. गर्भवती महिलाएं एवं स्तनपान कराने वाली माताएं तीन किस्तों में 5,000 रुपये का नकद लाभ निदेशालय, महिला एवं बाल विकास से प्राप्त कर सकती हैं.

उपलब्धियां

योजना के तहत जनवरी 2018 से अक्तूबर अंत तक 64586 लाभार्थियों के बैंक खातों में 2282.57 लाख रुपये की राशि जमा की जा चुकी है. हिमाचल प्रदेश ने योजना के तहत 147 प्रतिशल लक्ष्य हासिल कर लिया है और सितम्बर, 2018 को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार ने इस योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ आंका है.

 हिमचाल की जयराम सरकार ने भी महिलाओं के उत्थान के लिए कई वादे किए थे
फाइल फोटो

‘बेटी है अनमोल योजना’ के अन्तर्गत बी.पी.एल. परिवार में जन्म लेने वाली बालिका को जन्म पश्चात दी जाने वाली एकमुश्त अनुदान सहायता राशि को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये किया गया है. इसी प्रकार, गरीब महिलाओं को मदर टेरेसा असहाय मातृ संबल योजना के अन्तर्गत बच्चों के पालन-पोषण हेतु दी जाने वाली सहायता राशि को 4000 रुपये से बढ़ाकर 5000 रूपये प्रति बच्चा प्रतिवर्ष किया गया है.

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प्रदेश में पोषण अभियान की शुरुआत की गई है. अभियान के अन्तर्गत राज्य के पॉंच जिलों क्रमशः चम्बा, हमीरपुर, शिमला सोलन व ऊना का चयन किया गया है. अभियान के तहत अल्पवज़न, ठिगनेपन, विकास अवरूद्धता एवं अनीमिया इत्यादि की समस्या से निपटने के प्रयास किए जा रहे हैं. पोषण माह के दौरान अलग-अलग स्तरों पर उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रदेश को भारत सरकार के नीति आयोग द्वारा पांच पुरस्कार प्रदान किए गए हैं.

नौ जिलों में संचालन की अनुमति

ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए नई योजना ‘महिला शक्ति केंद्र’ को राज्य के नौ जिलों में संचालन की अनुमति प्रदान की गई है. राज्य में कन्या सशक्तिकरण के लिए सक्षम गुड़िया बोर्ड़ की स्थापना की गई है. बोर्ड के उद्देश्यों में बालिकाओं/ किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए नीति के लिए सिफारिश करना, इनकी सुरक्षा से संबधित कृत्यों नियमों, नीतियों और कार्यक्रमों पर सिफारिश करना, बालिकाओं के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए विभिन्न विभागों द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की समीक्षा करना तथा बालिकाओं/ किशारियों के विरुद्ध हो रहे अपराधों को रोकने के लिए सुझाव देना शामिल हैं.

ग्राम सभा और पंचायत

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री का कहना है कि विभाग महिलाओं के उत्थान के लिए कार्यान्वित की जा रही सभी कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित बना रहा है. योजना से एक भी पात्र महिला वंचित न रहे, इसके लिए जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जा रहा है और विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह ग्राम सभाओं और पंचायतों के माध्यम से पात्र महिलाओं का पता लगाकर उन्हें लाभान्वित करें. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की अनेक योजनाओं से राज्य में महिला सशक्तिकरण को नई ऊर्जा मिली है.