धरने पर बैठे श्रमिकों ने मांगों को लेकर बरसात में भी की नारेबाजी

धरने पर बैठे श्रमिकों ने मांगों को लेकर बरसात में भी की नारेबाजी-Panchayat Times
धरने पर बैठे श्रमिकों ने मांगों को लेकर बरसात में भी की नारेबाजी

हरियाणा. समस्त मजदूर संगठन के बैनर तले भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान में कार्य कर रहे मजदूरों ने मंगलवार 61वें दिन भी अपनी हड़ताल जारी रखा. श्रमिकों के हौसले इतने बुलंद है कि वह दिनभर चली बरसात के बीच भी धरने पर डटे हुए हैं. लगातार अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. श्रमिकों ने सरकार विरोधी जमकर नारेबाजी कर रोष जताया.

इस दौरान श्रमिकों ने चेतवानी दी कि जब तक उन्हें डीसी रेट नहीं दिया जाता वह हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे. श्रमिकों ने सरकार को कोसते हुए डीसी रेट तुरंत प्रभाव से दिए जाने की मांग की. हड़ताल पर बैठे मजदूरों ने बताया कि उन्हें धरने पर बैठे हुए दो माह बीत चुके हैं. लेकिन, कोई भी सरकार का प्रतिनिधि एवं अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा है, जिससे साफ है कि सरकार उनकी रोजी-रोटी छीनने का काम कर रही है.

श्रमिकों ने मांग की कि पहले से जो डीसी रेट लागू किया गया है. वही, उन्हें मिलना चाहिए, लेकिन श्रमिकों को कहीं से भी कोई ठोस कार्रवाई या मदद नहीं मिल रही है. उन्होंने सरकार से अपील की कि बेरोजगार के मुंह में धकेले गए श्रमिकों की मांगों को पूरा करते हुए, उन्हें राहत दी जाए और संस्थान में 535 रुपए प्रतिदिन का डीसी रेट लागू किया जाए.

श्रमिकों ने आरोप लगाया कि संस्थान के निदेशक डॉ. ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह अपनी बात पर अडिग हैं और कोई भी बात सुनने पर राजी नहीं है. इधर समस्त मजदूर हड़ताल पर डटे हुए हैं. मजदूरों का कहना है कि अब तो उन्हें लगने लगा है कि सरकार की ओर से की गई घोषणाएं मात्र दिखावा है. हड़ताल पर बैठे मजदूरों ने कहा कि संस्थान में पहले से लागू डीसी रेट को घटाया जाना कहीं न कहीं मजदूरों का आर्थिक शोषण है और जब तक मजदूरों का शोषण बंद नहीं होता मजदूरों की लड़ाई शोषण के विरुद्ध जारी रहेगी.

हड़ताली मजदूरों ने कहा कि इस संस्थान की स्थापना से अब तक यहां पर डीसी रेट मिल रहा था जोकि हर साल बढ़ता है. 2017 में यह रेट 465 प्रतिदिन लागू था जोकि मार्च 2018 को बढक़र 535 रुपए प्रतिदिन हुआ है. अब निदेशक महोदय भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल ने आदेश जारी किया है कि इस संस्थान में अब डीसी रेट लागू नहीं होगा और यहां पर केन्द्र का रेट लागू किया जा रहा है जोकि 318 रुपये प्रतिदिन है, जिससे मजदूरों का गुजारा नहीं चल सकता.