विश्व अल्जाइमर दिवस: दुनिया में पांच करोड़ लोग भूलने की बीमारी के शिकार

विश्व अल्जाइमर दिवस: दुनिया में पांच करोड़ लोग भूलने की बीमारी के शिकार

नई दिल्ली. दुनिया में हर तीसरे सेकंड एक व्यक्ति भुलक्कड़ बनता जा रहा है. भागती-दौड़ती जिंदगी के तनाव, सही खानपान व कसरत की कमी और बढ़ती उम्र जैसे कई कारण लोगों की याददाश्त छीन रहे हैं. वर्ल्ड अल्जाइमर रिपोर्ट-2018 की रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में 50 मिलियन लोग डिमेंशिया यानि याददाश्त खोने की बीमारी के शिकार हैं . इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2030 तक यह संख्या बढ़कर 82 मिलियन हो जाएगी. अगर यह बीमारी ऐसी ही बढ़ती रही तो 2050 तक 152 मिलियन लोग इस बीमारी की चपेट में होंगे.

वर्ल्ड अल्जाइमर रिपोर्ट 2018 के अनुसार डिमेंशिया की समस्या से ग्रस्त लोगों के मामले में पहले 10 देशों में भारत तीसरे स्थान पर है. अल्जाइमर डिजीज इंटरनेशनल नामक संगठन की तरफ से वर्ल्ड अल्जाइमर रिपोर्ट-2018 रिपोर्ट तैयार करने वाली लेखक, ब्रॉडकास्टर और कंसल्टेंट क्रिस्टीना पैटरसन ने बताया, ”वर्ल्ड अल्जाइमर रिपोर्ट-2018 रिपोर्ट दुनिया भर में इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूकता फैलाने के लिए तैयार की गई है.”

विश्व अल्जाइमर दिवस (World Alzheimer’s Day) प्रतिवर्ष 21 सितम्बर को मनाया जाता है. यह दिवस अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया के बारे में जागरूकता प्रसारित करने के लिए मनाया जाता है. अल्जाइमर भूलने की बीमारी है. बीमारी जब अडवांस्ड स्थिति में पहुंच जाती है, तो मरीज अपने परिजनों और रिश्तेदारों को पहचनाना तक बंद कर देता है. अल्जाइमर डिमेंशिया का ही एक रूप है, जिसका असर याददाश्त पर होता है.यह एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जो मस्तिष्क कोशिकाओं के लगातार नुकसान के कारण होती है.

देश में लगभग 16 लाख लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं. यह कहना है इन्द्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के न्यूरोलोजी विभाग के सीनियर कन्सलटेन्ट डॉ. विनीत सूरी का. डॉ. सूरी ने बताया, ”अल्जाइमर पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता, लेकिन मरीज के जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है. ऐसी कई दवाएं हैं, जिनके द्वारा मरीज के व्यवहार में सुधार लाया जा सकता है. ”

पढ़ें: अल्जाइमर रिपोर्ट-2018 https://www.alz.co.uk/research/WorldAlzheimerReport2018.pdf

उन्होंने कहा कि कई प्रयासों से मरीज के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है जैसे व्यायाम, सेहतमंद आहार, उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण, डिसलिपिडिमा और डायबिटीज पर नियंत्रण और मरीज को बौद्धिक गतिविधियों में शामिल करना जैसे नई भाषा सीखने, मेंटल गेम्स या म्यूजिक में व्यस्त रखना.

85 प्रतिशत युवाओं को अल्जाइमर के बारे में पता ही नहीं!

युवाओं में अल्जाइमर और डिमेंशिया की जानकारी के स्तर का पता लगाने के लिए एक निजी अस्पताल द्वारा कराये गये सर्वे में पता चला है कि 85 प्रतिशत नौजवानों को अल्जाइमर की समस्या के बारे में पता ही नहीं है वहीं 91 प्रतिशत युवक भूलने की समस्या को बीमारी ही नहीं मानते. फोर्टिस फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजन ढल अस्पताल में न्यूरोलॉजी विभाग की कंसल्टेंट डॉ माधुरी बिहारी के नेतृत्व में कराये गये सर्वेक्षण में युवाओं में अल्जाइमर की जानकारी के स्तर का पता लगाया गया.

सर्वे के नतीजों में यह बात सामने आई कि 91 प्रतिशत लोग भूलने की समस्या को बीमारी नहीं मानते. 85 प्रतिशत युवाओं को अल्जाइमर के बारे में पता ही नहीं था. डॉ माधुरी के अनुसार, भारत में हर मिनट किसी को डिमेंशिया होता है. इस समस्या में केवल उपचार नहीं बल्कि परिवार के सदस्यों की देखभाल भी बहुत जरूरी है. उनका जीवन अपने परिजनों पर आश्रित हो जाता है. यह समस्या हल्की-फुल्की भूलने की समस्या से शुरू होती है और इस स्तर तक पहुंच जाती है जहां कोई व्यक्ति अपने करीबी परिजनों तक को नहीं पहचान पाता.

उन्होंने बताया कि ये लक्षण धीरे-धीरे दिखने शुरू होते हैं और बढ़ते जाते हैं. विशेषज्ञ इस दिशा में जागरकता की जरूरत बताते हुए कहते हैं कि सुडोकू जैसी पहेलियों का हल निकालने और मस्तिष्क को अन्य ऐसी गतिविधियों में लगाना भी महत्वपूर्ण है.