विश्व रेडियो दिवस पर खास प्रस्तुति

नई दिल्ली. 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस के रूप में मनाया जाता है. इंटरनेट, मोबाइल और टेक्नोलॉजी के इस दौर में रेडियो सुनने वालों की दीवानगी आज भी बरकरार है. प्रधानमंत्री भी जानते हैं अगर जनता से सीधे संवाद करना है तो मन की बात रेडियो से ही हो सकती है.

विश्व रेडियो दिवस मनाए जाने की शुरुआत अभी हाल ही में हुई है. साल 2011 में यूनेस्को ने विश्वस्तर पर रेडियो ने विश्वस्तर पर रेडियो दिवस मनाने का निर्णय लिया. 13 फरवरी का ही दिन विश्व रेडियो दिवस के रूप में चुना गया, क्यों कि 1946 में इसी दिन संयुक्त राष्ट्र संघ ने रेडियो यूएनओ के प्रसारण की शुरुआत की थी.

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विकिपीडिया के अनुसार 24 दिसम्बर 1906 की शाम कनाडाई वैज्ञानिक रेगिनाल्ड फेसेंडेन ने जब अपना वॉयलिन बजाया और अटलांटिक महासागर में तैर रहे तमाम जहाजों के रेडियो ऑपरेटरों ने उस संगीत को अपने रेडियो सेट पर सुना, वह दुनिया में रेडियो प्रसारण की शुरुआत थी.

टेक्नोलॉजी के इस दौर में रेडियो के आकार और सुनने के तरीकों में काफी बदलाव आ गया है. अब रेडियो ट्रांजिस्टर का बड़ा सा बॉक्स लोगों के मोबाइल और कार का एक फीचर बन चुका है. लोगों का रेडियो उनके स्मार्ट फोन में हमेशा उनके साथ रहता है.

रेडियो आज भी संचार का सबसे सस्ता और सुलभ माध्यम है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह सबसे लोकप्रिय माध्यम है. रेडियो दुनिया का सबसे सुलभ मीडिया है. दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर रेडियो सुना जा सकता है. पढ़े-लिखे हो या अनपढ़, सभी रेडियो से जुड़े होते हैं.

एक वक्त था कि रेडियो मनोरंजन का एकमात्र साधन होता था. बच्चे हो या बूढ़े, सभी अपने काम से निवृत होकर सभी रेडियो लेकर बैठ जाते थे. मनोरंजन के साथ साथ देश-दुनिया की बातें रेडियो से मिलती थी. समय बीतने के साथ रेडियो आज भी लोगों का मनोरंजन कर रही है. हालांकि समय के साथ इसकी चमक थोड़ी फीकी हुई है.

रेडियो की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि राजनीतिक पार्टियों के लिए अब ये प्रचार का एक जरूरी अंग बन गया है. सरकारी रेडियो स्टेशन के अलावा इतने प्राइवेट स्टेशन खुल चुके हैं. जो लोगों तक आसानी से पहुंच बनाते हैं. इनका उपयोग कर राजनीतिक पार्टियों से लेकर किसी सामान का प्रचार कर उसे आम आदमी तक आसानी से पहुंचाया जा रहा है.