नई दिल्ली. देश में शहरी बेरोजगारी दर में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों के लिए शहरी बेरोजगारी दर 6.6 प्रतिशत रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 6.7 प्रतिशत थी। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 4 प्रतिशत से बढ़कर 4.3 प्रतिशत पर पहुंच गई।
श्रम भागीदारी दर में भी हल्की नरमी
रिपोर्ट के मुताबिक कुल श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) में भी मामूली गिरावट देखी गई। चौथी तिमाही में यह दर 55.5 प्रतिशत रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 55.8 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में LFPR 58.2 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 50.2 प्रतिशत दर्ज किया गया। महिलाओं की श्रम भागीदारी दर 34.7 प्रतिशत पर लगभग स्थिर बनी रही।
ग्रामीण और शहरी रोजगार का अलग-अलग ढांचा
आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ कि रोजगार का ढांचा अभी भी पारंपरिक पैटर्न पर कायम है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश लोग कृषि और अन्य प्राथमिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं, जबकि शहरों में सेवा क्षेत्र यानी तृतीयक सेक्टर रोजगार का मुख्य स्रोत बना हुआ है।
SBI रिपोर्ट ने जताई विकास दर में नरमी की आशंका
FY27 में 6.6% GDP वृद्धि का अनुमान
State Bank of India की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह वित्त वर्ष 2025-26 के संभावित 7.5 प्रतिशत विकास दर से कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और क्षेत्रीय तनावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था लचीलेपन का परिचय दे रही है।
घरेलू मांग और क्रेडिट ग्रोथ बने रहेंगे सहारा
रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में बैंक क्रेडिट ग्रोथ मजबूत बनी रहेगी। साथ ही घरेलू खपत भी आर्थिक वृद्धि को समर्थन देती रहेगी, जिससे अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलेगी।
महंगाई पर मंडरा रहे कई खतरे
हालांकि SBI रिपोर्ट ने महंगाई को लेकर चिंता भी जताई है। मजबूत रबी फसल से खाद्य आपूर्ति की स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव तथा संभावित एल नीनो प्रभाव महंगाई में अस्थिरता बढ़ा सकते हैं।
रुपये पर दबाव और AI पर बड़ा फोकस
भुगतान संतुलन सुधारने के लिए व्यापक नीति की जरूरत रिपोर्ट में कहा गया है कि रुपये में कमजोरी और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच भारत को भुगतान संतुलन (Balance of Payments) सुधारने के लिए व्यापक रणनीति अपनाने की जरूरत है। इसके तहत भारतीय प्रवासी बॉन्ड को नए ढंग से पेश करने की सिफारिश की गई है, जिसमें बेहतर रिटर्न, अवधि और टैक्स राहत जैसे विकल्प शामिल हों।
AI से बढ़ सकती है भारत की आर्थिक ताकत
रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भारत की भविष्य की आर्थिक वृद्धि का अहम आधार बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार विकसित देशों में 2024-25 के दौरान AI ने हर साल GDP में 0.1 से 0.5 प्रतिशत तक योगदान दिया। ऐसे में भारत को भी AI आधारित उत्पादकता, प्रतिस्पर्धा और वैश्विक वैल्यू चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए नई नीतियों पर तेजी से काम करने की जरूरत है।
