नई दिल्ली. वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी के बीच देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू ईंधन कीमतों में लंबे समय से कोई बढ़ोतरी नहीं होने के कारण सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation और Hindustan Petroleum Corporation जैसी सरकारी कंपनियां पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस LPG की बिक्री पर बड़ा घाटा झेल रही हैं।
हर दिन 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की अंडर-रिकवरी
रिपोर्ट के अनुसार, तीनों सरकारी कंपनियों की संयुक्त अंडर-रिकवरी रोजाना 1000 करोड़ से 1200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। बीते करीब 10 हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है, लेकिन घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल के दाम लगभग स्थिर रखे गए हैं।
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर बनी हुई है। वहीं मार्च में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन इसके बावजूद कंपनियां लागत से कम कीमत पर गैस बेच रही हैं।
अप्रैल-जून तिमाही में मुनाफा खत्म होने का खतरा
रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल से जून तिमाही के दौरान होने वाला नुकसान कंपनियों के पूरे साल के अनुमानित मुनाफे को खत्म कर सकता है। चालू वित्त वर्ष में इन कंपनियों का कुल संभावित मुनाफा करीब 76 हजार करोड़ रुपये आंका गया था, लेकिन मार्च से अब तक हुए नुकसान को जोड़ने पर कुल घाटा 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
पेट्रोल, डीजल और LPG पर भारी नुकसान
अनुमानों के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल पेट्रोल पर करीब 14 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 42 रुपये प्रति लीटर और घरेलू LPG सिलेंडर पर लगभग 674 रुपये का नुकसान उठा रही हैं।
बढ़ सकता है कंपनियों का कर्ज
बढ़ते घाटे की वजह से सरकारी कंपनियों की उधारी जरूरतें भी बढ़ सकती हैं। कंपनियों को कच्चे तेल की खरीद और ईंधन आपूर्ति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की जरूरत पड़ रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो कुछ पूंजीगत परियोजनाओं की समयसीमा में बदलाव किया जा सकता है। हालांकि रिफाइनिंग विस्तार, ऊर्जा सुरक्षा, एथेनॉल ब्लेंडिंग और वैकल्पिक ईंधन से जुड़े रणनीतिक निवेश सरकार के समर्थन से जारी रहेंगे।
आयात पर निर्भरता से बढ़ी चुनौती
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। देश कच्चे तेल, LPG और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारत की ऊर्जा लागत पर पड़ रहा है।
सरकार ने उपभोक्ताओं पर नहीं डाला पूरा बोझ
वैश्विक बाजार में ईंधन कीमतों में उछाल के बावजूद केंद्र सरकार ने अब तक पूरा बोझ आम लोगों पर नहीं डाला है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती कर उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की है। रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये किया गया, जबकि डीजल पर शुल्क 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया। इससे सरकार के राजस्व पर हर महीने करीब 14 हजार करोड़ रुपये का असर पड़ रहा है।
