नई दिल्ली. त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले केंद्र सरकार ने चुनिंदा खाद्य तेलों के आयात पर कस्टम ड्यूटी घटाने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने 23 सितंबर 2026 को Notification No. 31/2026-Customs जारी कर पहले की अधिसूचना में बदलाव किया है। नई ड्यूटी दरें 24 सितंबर 2026 से लागू हो गई हैं। सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब त्योहारों के दौरान घरों के साथ-साथ मिठाई, नमकीन, फूड सर्विस और HORECA सेक्टर में खाद्य तेलों की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
इन खाद्य तेलों पर कितनी घटी ड्यूटी?
नई अधिसूचना के अनुसार, Serial Number 41 और 46 के तहत आने वाले आयात पर कस्टम ड्यूटी 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी गई है। वहीं Serial Number 42 और 47 के लिए ड्यूटी 32.5 फीसदी से घटाकर 27.5 फीसदी की गई है। Serial Number 49 पर लगने वाली 10 फीसदी ड्यूटी को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, जबकि Serial Number 50 के लिए दर 32.5 फीसदी से घटाकर 22.5 फीसदी कर दी गई है।
सरकार ने ये बदलाव Customs Act, 1962 और Customs Tariff Act, 1975 के तहत किए हैं। इससे आयातित खाद्य तेलों की लागत पर असर पड़ सकता है और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
इंडस्ट्री को कीमतों में राहत की उम्मीद
Indian Vegetable Oil Producers’ Association (IVPA) के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने कहा कि ड्यूटी में कटौती त्योहारी सीजन से पहले महत्वपूर्ण समय पर हुई है। उनके मुताबिक, कम आयात शुल्क से imported edible oils की landed cost घट सकती है, जिसका कुछ असर उपभोक्ता कीमतों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, खुदरा बाजार में तेल कितना और कितनी जल्दी सस्ता होगा, यह केवल आयात शुल्क पर निर्भर नहीं करेगा। अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी कीमतें, माल ढुलाई का खर्च, रुपये की विनिमय दर, घरेलू उपलब्धता और कंपनियों के पास मौजूद स्टॉक जैसे कई कारक अंतिम कीमत को प्रभावित करेंगे।
सूरजमुखी तेल के आयात को मिल सकती है ज्यादा गुंजाइश
नई ड्यूटी व्यवस्था का असर खाद्य तेलों की खपत के पैटर्न पर भी पड़ सकता है। उद्योग के अनुसार, सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी में अपेक्षाकृत ज्यादा कटौती की गई है। इससे दक्षिण भारत जैसे बड़े उपभोक्ता बाजार में इसकी कीमत और मांग पर असर पड़ सकता है।
भारत अपनी खाद्य तेल जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों और वैश्विक सप्लाई में बदलाव का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है। सूरजमुखी और सोयाबीन तेल के आयात में अधिक लचीलापन मिलने से कुछ मांग पाम ऑयल से इन तेलों की ओर भी जा सकती है।
नेपाल से आने वाले जीरो-ड्यूटी तेल पर चिंता
खाद्य तेल उद्योग ने नेपाल से होने वाले zero-duty imports को लेकर भी चिंता जताई है। IVPA के अनुसार, खासकर उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के बाजारों में नेपाल से आने वाले आयात घरेलू स्तर पर रिफाइन किए गए तेलों के मुकाबले प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए हुए हैं। संगठन ने SAFTA देशों से होने वाले zero-duty imports के लिए import quota की मांग भी की है।
त्योहारों में सप्लाई बनाए रखना बड़ी चुनौती
त्योहारी मौसम में खाद्य तेल की मांग बढ़ने के साथ सरकार और उद्योग के सामने उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को नियंत्रित रखने, पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराने और घरेलू तिलहन किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती रहेगी। समय पर आयात, पर्याप्त inventory और बेहतर distribution व्यवस्था से बढ़ी हुई मौसमी मांग को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, आयात शुल्क में कटौती से imported edible oils की लागत कम होने की संभावना है, लेकिन इसका सीधा लाभ खुदरा ग्राहकों तक कितना पहुंचेगा, यह वैश्विक कीमतों और घरेलू बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
