नई दिल्ली. राजस्थान में कम बारिश के चलते आने वाले महीनों में पेयजल संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है। मौजूदा जल स्रोतों से मिलने वाले पीने के पानी की उपलब्धता में 30 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है। संभावित संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) सभी जिलों से पेयजल स्रोतों की स्थिति की रिपोर्ट लेकर आकस्मिक योजनाएं तैयार कर रहा है, ताकि गर्मियों में लोगों को पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े।
जिलों में पेयजल संकट से निपटने की तैयारी
पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए जिला स्तर पर ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जा रही है, जहां गर्मियों के दौरान पानी की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका अधिक है। इसके लिए जल स्रोतों की मौजूदा स्थिति, भूजल की उपलब्धता, ट्यूबवेल और खुले कुओं की हालत तथा वैकल्पिक जल स्रोतों की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है।
जिलों से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर जरूरत वाले इलाकों में नए ट्यूबवेल लगाने, खराब पंप-मोटर बदलने और पुरानी पाइपलाइनों की मरम्मत जैसे कामों को प्राथमिकता दी जाएगी। जहां पेयजल की कमी अधिक होगी, वहां PHED के समन्वय से टैंकरों या अन्य माध्यमों से पानी पहुंचाने की व्यवस्था के प्रस्ताव भी तैयार किए जा सकेंगे।
कलेक्टरों को 75 लाख रुपये तक के काम मंजूर कराने का अधिकार
पेयजल संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार ने जिला कलेक्टरों को विशेष अधिकार दिए हैं। अक्टूबर से दिसंबर के बीच प्रत्येक जिले में 75 लाख रुपये तक के पेयजल कार्यों से जुड़े प्रस्ताव मंजूर कराने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आपात जरूरतों को देखते हुए जिला कलेक्टर संबंधित अतिरिक्त मुख्य अभियंताओं को आवश्यक कार्यों के प्रस्ताव भेज सकेंगे। इन कार्यों की मंजूरी IFMS 3.0 मॉड्यूल के माध्यम से ऑनलाइन जारी की जाएगी।
विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बड़े कार्यों के बजाय जरूरत के मुताबिक छोटे, लेकिन जरूरी कामों पर भी ध्यान दिया जाए। इनमें खराब पंप-मोटर बदलना, अचानक सूखने या खराब होने वाले ट्यूबवेल के विकल्प के तौर पर दूसरे जल स्रोत विकसित करना और पुरानी व क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों की मरम्मत करना शामिल है।
कोटा समेत कुछ क्षेत्रों में फिलहाल स्थिति बेहतर
राजस्थान के कुछ हिस्सों में फिलहाल पेयजल की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है। इनमें कोटा, झालावाड़, डीग और बांसवाड़ा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। हालांकि, आने वाले महीनों में पानी की उपलब्धता को लेकर इन इलाकों सहित अन्य जिलों में भी निगरानी और योजना बनाने का काम जारी है।
इसके साथ ही सिंचाई के लिए पानी के आवंटन और नहरों के संचालन को लेकर नई व्यवस्था तैयार करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि उपलब्ध जल संसाधनों का जरूरत के अनुसार प्रबंधन किया जा सके।
14 जिलों में कम बारिश, 12 में औसत से नीचे वर्षा
बारिश के आंकड़े भी राज्य में संभावित जल संकट की चिंता बढ़ा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राजस्थान के 14 जिलों में कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि 12 जिलों में वर्षा औसत से नीचे रही। वहीं, 15 जिलों में बारिश सामान्य श्रेणी में दर्ज की गई है।
कम वर्षा का असर भूजल स्तर और पेयजल स्रोतों की उपलब्धता पर पड़ सकता है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए PHED ने सभी जिलों से रिपोर्ट जुटाकर उन क्षेत्रों को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू की है, जहां गर्मियों में पानी की आपूर्ति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सभी जिलों की रिपोर्ट के आधार पर बनेगी आकस्मिक योजना
PHED के मुख्य अभियंता देवराज सोलंकी के अनुसार, सभी जिलों से पेयजल स्रोतों की स्थिति की रिपोर्ट लेने के बाद आकस्मिक योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि जरूरत के हिसाब से नए ट्यूबवेल लगाने, खराब पंप-मोटर बदलने और पाइपलाइनों की मरम्मत के कार्य चिह्नित किए जाएंगे।
सरकार का जोर समय रहते जरूरी इंतजाम करने पर है, ताकि गर्मियों में पेयजल संकट की स्थिति बनने पर प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
