नई दिल्ली. त्योहारी सीजन से पहले केंद्र सरकार ने राज्यों को बड़ी वित्तीय राहत दी है। सरकार ने 31 अक्टूबर को राज्यों को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के तौर पर 1,09,019 करोड़ रुपये की अतिरिक्त किस्त जारी की। यह राशि राज्यों को मिलने वाले नियमित मासिक हस्तांतरण के अतिरिक्त है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य राज्यों को विकास कार्यों में तेजी लाने, बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराना है।
वित्त वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को जारी की गई यह दूसरी अतिरिक्त किस्त है। इससे पहले अगस्त में भी इतनी ही राशि राज्यों को अग्रिम किस्त के रूप में दी गई थी।
उत्तर प्रदेश को मिले सबसे ज्यादा 19,208 करोड़ रुपये
केंद्र की ओर से जारी इस राशि में सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश को मिला है। राज्य को 19,208 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके बाद बिहार को 10,845 करोड़ रुपये और मध्य प्रदेश को 8,010 करोड़ रुपये मिले हैं।
अन्य राज्यों को मिली राशि इस प्रकार है:
| राज्य | जारी राशि |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 19,208 करोड़ रुपये |
| बिहार | 10,845 करोड़ रुपये |
| मध्य प्रदेश | 8,010 करोड़ रुपये |
| पश्चिम बंगाल | 7,866 करोड़ रुपये |
| महाराष्ट्र | 7,022 करोड़ रुपये |
| राजस्थान | 6,460 करोड़ रुपये |
| ओडिशा | 4,819 करोड़ रुपये |
| आंध्र प्रदेश | 4,597 करोड़ रुपये |
| कर्नाटक | 4,504 करोड़ रुपये |
| तमिलनाडु | 4,466 करोड़ रुपये |
| गुजरात | 4,094 करोड़ रुपये |
त्योहारी सीजन में विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार
वित्त मंत्रालय के अनुसार, अतिरिक्त राशि जारी करने के पीछे राज्यों की पूंजीगत व्यय क्षमता को बढ़ाना एक प्रमुख उद्देश्य है। इससे राज्य सरकारें सड़क, परिवहन, बिजली, पेयजल और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर खर्च तेज कर सकती हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य, शिक्षा और दूसरी जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए भी वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे।
त्योहारी सीजन के दौरान राज्यों की खर्च संबंधी जरूरतें बढ़ सकती हैं। ऐसे में केंद्र से मिलने वाली अतिरिक्त राशि उन्हें अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार धन का इस्तेमाल करने की अधिक गुंजाइश देगी।
क्या होता है टैक्स डिवोल्यूशन?
टैक्स डिवोल्यूशन का मतलब केंद्र सरकार की ओर से वसूले गए केंद्रीय करों का निर्धारित हिस्सा राज्यों को देना है। इससे राज्य सरकारों को विकास परियोजनाओं, सार्वजनिक सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन मिलते हैं।
मौजूदा व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार सामान्य तौर पर साल में 14 किस्तों में राज्यों को करों में उनकी हिस्सेदारी जारी करती है। वित्त वर्ष के दौरान केंद्रीय करों के विभाज्य पूल का 41 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को दिया जाता है। यह व्यवस्था राज्यों को अपने खर्च और विकास की जरूरतों के लिए संसाधन उपलब्ध कराने में मदद करती है।
पहली छमाही में राज्यों को मिले करीब 7 लाख करोड़ रुपये
नियंत्रक महालेखा परीक्षक (Controller General of Accounts) के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में राज्यों को करों में हिस्सेदारी के रूप में कुल मिलाकर करीब 7 लाख करोड़ रुपये मिल चुके थे।
केंद्रीय बजट 2026-27 में राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के तहत कुल 15.26 लाख करोड़ रुपये देने का अनुमान रखा गया है। इसकी तुलना में वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान में यह राशि 13.93 लाख करोड़ रुपये थी।
इस अतिरिक्त किस्त से राज्यों को बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने और विकास संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
