नई दिल्ली. संसद के मानसून सत्र में सोमवार को सरकार की ओर से लोकसभा में चार महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने हैं। सरकार के विधायी एजेंडे में न्यायाधिकरणों में सुधार, खनिज क्षेत्र में बदलाव, केरल के नाम में परिवर्तन और सहकारी क्षेत्र से जुड़े कानून में संशोधन शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने राम मंदिर दान मामले और दलबदल कानून में बदलाव की मांग को लेकर सरकार के सामने कई सवाल रखे हैं।
सरकार की नजर चार बड़े विधेयकों पर
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026 पेश करेंगे। इस विधेयक का उद्देश्य न्यायाधिकरणों की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ उनके अध्यक्षों और सदस्यों की योग्यता, नियुक्ति तथा सेवा शर्तों में पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करना है। सरकार का जोर न्यायाधिकरणों के कामकाज को अधिक प्रभावी और स्वतंत्र बनाने पर है।
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी खनिज और खनन कानून में संशोधन से जुड़ा विधेयक पेश करेंगे। इसके जरिए 1957 के संबंधित कानून में आगे बदलाव किए जाने का प्रस्ताव है। सरकार का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में व्यवस्था को बेहतर बनाने और महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
अमित शाह पेश करेंगे केरल के नाम में बदलाव वाला विधेयक
गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में केरल के नाम में बदलाव से संबंधित विधेयक पेश करेंगे। प्रस्तावित विधेयक में राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने की बात कही गई है।
इस बदलाव के लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन किया जाना है। विधेयक पारित होने के बाद संविधान में राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरलम’ दर्ज किया जा सकेगा।
सहकारी क्षेत्र से जुड़ा विधेयक भी आएगा
अमित शाह राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम कानून में संशोधन से संबंधित विधेयक पेश करने की अनुमति भी मांगेंगे। प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य सहकारी क्षेत्र से जुड़े संस्थानों और उनकी कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है।
सरकार का मानना है कि सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने से देश के ग्रामीण और आर्थिक विकास में मदद मिल सकती है।
राम मंदिर दान मामले पर चर्चा की मांग
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में अयोध्या स्थित राम मंदिर के दान से जुड़े कथित गबन मामले पर चर्चा कराने की मांग की है। उन्होंने सदन की कार्यवाही रोककर इस मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए प्रस्ताव दिया।
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े मामले में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं और दान की राशि के दुरुपयोग के आरोप सामने आए हैं। उन्होंने केंद्र से उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
कांग्रेस सांसद ने मांग की कि जांच उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। उनका कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए दान से जुड़े मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ जांच होनी चाहिए।
दलबदल कानून में बदलाव की मांग
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में नए दलबदल विरोधी कानून की जरूरत का मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन की कार्यवाही स्थगित कर इस विषय पर चर्चा कराने के लिए प्रस्ताव दिया।
उनका कहना है कि राजनीतिक लाभ के लिए बड़े पैमाने पर होने वाले दल-बदल को रोकने के लिए मौजूदा कानून में बदलाव की जरूरत है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कानून ऐसा होना चाहिए जिससे दल के भीतर वास्तविक और ईमानदार असहमति रखने वाले नेताओं की आवाज दबे नहीं।
1985 में संविधान में जोड़ा गया था दलबदल विरोधी कानून
दलबदल विरोधी प्रावधान को संविधान में 1985 में 52वें संविधान संशोधन के जरिए जोड़ा गया था। इसे संविधान की दसवीं अनुसूची में शामिल किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य दल बदलने वाले सांसदों और विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की व्यवस्था करना है।
यह प्रावधान संसद और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों पर लागू होता है। हालांकि समय-समय पर इस कानून की प्रभावशीलता और इसके प्रावधानों को लेकर बहस होती रही है।
सरकार के विधायी एजेंडे और विपक्ष के मुद्दों पर नजर
सोमवार को संसद में सरकार के चार महत्वपूर्ण विधेयकों के साथ विपक्ष के कई अहम मुद्दे भी चर्चा में रहने की संभावना है। एक तरफ सरकार न्यायाधिकरण, खनन, केरल के नाम और सहकारी क्षेत्र से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष राम मंदिर दान मामले और दलबदल कानून जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।
ऐसे में मानसून सत्र का यह दिन सरकार और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सदन की कार्यवाही के दौरान विधेयकों पर चर्चा के साथ-साथ विपक्ष की ओर से उठाए गए मुद्दों पर भी राजनीतिक गर्मी बढ़ने के आसार हैं।
