नई दिल्ली. दुनियाभर के खाद्य बाजार 2026 की दूसरी छमाही में एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जहां एक ओर कुल खाद्य कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर दिखाई दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर गेहूं, मक्का और चीनी जैसी प्रमुख कृषि चीजों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बन रही है। भू-राजनीतिक तनाव, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अनिश्चितताएं और ऊर्जा लागत में वृद्धि वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बढ़ा रही हैं, जिससे आने वाले महीनों में खाद्य मुद्रास्फीति और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में वैश्विक खाद्य वस्तुओं की कीमतों को मापने वाला FAO फूड प्राइस इंडेक्स 130.8 अंक पर रहा, जो अप्रैल के संशोधित 131 अंक से 0.2 प्रतिशत कम है। हालांकि, यह सूचकांक पिछले वर्ष की तुलना में 2.9 प्रतिशत अधिक है और जनवरी 2023 के बाद के उच्चतम स्तरों के करीब बना हुआ है।
गेहूं और मक्का ने बढ़ाई चिंता
मई के दौरान अनाज की कीमतों में 2.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। गेहूं की कीमतों में लगातार चौथे महीने तेजी रही। इसका प्रमुख कारण अमेरिका सहित प्रमुख निर्यातक देशों में फसलों की खराब स्थिति और उत्पादन को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन और उर्वरकों की बढ़ती कीमतें भी कृषि लागत को बढ़ा रही हैं, जिससे भविष्य में उत्पादन और खाद्य उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
मक्का की कीमतों में भी मजबूती देखी गई। ब्राजील और अमेरिका में आपूर्ति सीमित रहने के साथ-साथ प्रमुख आयातक देशों की मांग बढ़ने से बाजार को समर्थन मिला। वहीं, ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण एथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का की मांग बढ़ने से भी कीमतों को बल मिला।
चावल की कीमतों में भी उछाल
वैश्विक खाद्य बाजार में स्थिरता का आधार माने जाने वाले चावल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भी मई के दौरान 2.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। एशिया के कई हिस्सों में मौसम संबंधी चिंताओं और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने चावल बाजार को प्रभावित किया।
वैश्विक अनाज उत्पादन में गिरावट का अनुमान
FAO के ताजा अनुमान के मुताबिक 2026-27 सीजन में वैश्विक अनाज उत्पादन करीब 2 प्रतिशत घटकर 2.98 अरब टन रह सकता है। गेहूं समेत सभी प्रमुख अनाज श्रेणियों में उत्पादन में कमी आने की आशंका जताई गई है। हालांकि उत्पादन अभी भी ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर रहेगा, लेकिन मांग के मुकाबले आपूर्ति में कमी बाजार को और संवेदनशील बना सकती है।
FAO के बाजार एवं व्यापार प्रभाग के निदेशक बूबाकर बेन-बेलहासेन ने कहा कि सतही स्थिरता के बावजूद खाद्य बाजारों के सामने कई जोखिम बने हुए हैं। मौसम से जुड़ी चुनौतियां, उत्पादन लागत में बढ़ोतरी और प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में व्यवधान वैश्विक खाद्य बाजार की स्थिरता के लिए खतरा बने हुए हैं।
वनस्पति तेल ने दी कुछ राहत
जहां अनाज और चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई, वहीं वनस्पति तेलों ने बाजार को कुछ राहत दी। FAO वेजिटेबल ऑयल प्राइस इंडेक्स मई में 4.6 प्रतिशत गिर गया, जो इस वर्ष की पहली मासिक गिरावट है। पाम ऑयल की मांग कमजोर पड़ने और कच्चे तेल बाजार में अनिश्चितता के कारण कीमतों पर दबाव बना। हालांकि इसके बावजूद वनस्पति तेलों की कीमतें अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक ऊंची बनी हुई हैं।
चीनी की कीमतों में सबसे बड़ी तेजी
मई के दौरान चीनी सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली जिंसों में शामिल रही। FAO शुगर प्राइस इंडेक्स में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ब्राजील में चीनी उत्पादन को लेकर बढ़ती चिंताओं और गन्ने के बड़े हिस्से को एथेनॉल उत्पादन में लगाए जाने की संभावना ने बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
इसके अलावा भारत और थाईलैंड में संभावित एल नीनो प्रभाव के कारण मौसम संबंधी जोखिम भी वैश्विक चीनी उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि चीनी की कीमतें अभी भी पिछले साल के स्तर से नीचे हैं, लेकिन हालिया तेजी भविष्य की आपूर्ति को लेकर बढ़ती आशंकाओं को दर्शाती है।
दूध और मांस बाजार अपेक्षाकृत स्थिर
दुग्ध उत्पादों की कीमतों में हल्की नरमी देखने को मिली, जबकि मांस की कीमतें लगभग स्थिर रहीं। चीन और अमेरिका की मजबूत मांग के कारण गोमांस बाजार को समर्थन मिला, जबकि यूरोप में अधिक आपूर्ति और कमजोर मांग के चलते सूअर के मांस की कीमतों पर दबाव बना रहा।
आगे और बढ़ सकती हैं चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनाज उत्पादन में संभावित गिरावट, उर्वरकों की ऊंची लागत और जलवायु संबंधी अनिश्चितताओं के बीच खाद्य कीमतों को स्थिर बनाए रखना आसान नहीं होगा। मई में भले ही कुल खाद्य मूल्य सूचकांक में मामूली गिरावट दर्ज हुई हो, लेकिन प्रमुख कृषि जिंसों में बढ़ती कीमतें संकेत दे रही हैं कि वैश्विक खाद्य व्यवस्था अभी भी बड़े झटकों के प्रति संवेदनशील बनी हुई है।

