नई दिल्ली. सरकार ने लोकसभा में बताया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच देश में गन्ने की 47 नई किस्में जारी और अधिसूचित की गई हैं। इनमें से 33 किस्मों को Extreme Climate Tolerant के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इन किस्मों को विकसित करने का उद्देश्य बदलते मौसम, सूखा, बाढ़, जलभराव, लवणीय मिट्टी और ठंड जैसी परिस्थितियों में गन्ने की फसल को अधिक मजबूत बनाना और किसानों के Crop Loss के जोखिम को कम करना है।
सूखा और जलभराव से लेकर खारी मिट्टी तक के लिए तैयार किस्में
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की राज्य मंत्री निमुबेन जयंतिभाई बंभानिया ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 33 Climate-Tolerant Varieties में 16 किस्में सूखा, नमी की कमी या Water Stress को सहन करने वाली हैं। वहीं 9 किस्में बाढ़, पानी में डूबने और Water-Logging जैसी परिस्थितियों के लिए विकसित की गई हैं।
इसके अलावा 7 किस्में Salinity, Moderate Salinity, Alkalinity और Sodic Soil जैसी परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार की गई हैं। एक किस्म को Cold, Frost और Winter Chilling जैसी ठंडी परिस्थितियों के प्रति सहनशील बनाया गया है।
ICAR संस्थानों ने किया किस्मों का विकास
सरकार के अनुसार इन गन्ने की किस्मों के विकास में ICAR-Indian Sugarcane Research Institute, Lucknow और ICAR-Sugarcane Breeding Institute, Coimbatore की अहम भूमिका रही है। इसके साथ ही Indian Council of Agricultural Research (ICAR) के तहत All India Coordinated Research Project (AICRP) on Sugarcane के माध्यम से भी शोध और विकास कार्य किए गए हैं।
इन शोध प्रयासों का लक्ष्य ऐसी गन्ना किस्मों को विकसित करना है, जो अलग-अलग कृषि-जलवायु परिस्थितियों में किसानों के लिए अधिक उपयोगी साबित हों और बदलते Climate Conditions के बीच उत्पादन को स्थिर बनाए रखने में मदद करें।
किसानों को आधुनिक तकनीक और Planting Material की मदद
सरकार ने बताया कि National Food Security and Nutrition Mission (NFSNM) के तहत Sugarcane Component देश के 28 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। इसके माध्यम से किसानों को Intercropping, Single Bud Chip Technology, Breeder Seed Production और Tissue Culture Plantlets जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने में सहायता दी जा रही है।
किसानों को Plant Protection Chemicals और Bioagents की उपलब्धता में भी सहयोग दिया जाता है। इसके अलावा Pradhan Mantri-Rashtriya Krishi Vikas Yojana (PM-RKVY) के Detailed Project Report Component के तहत राज्यों को गन्ने से जुड़ी स्थानीय जरूरतों के अनुसार प्राथमिकताएं तय करने की सुविधा दी गई है।
पांच साल में लाखों यूनिट गन्ना रोपण सामग्री किसानों तक पहुंची
सरकार के अनुसार पिछले पांच वर्षों के दौरान किसानों के लिए 2,51,941.5 क्विंटल Sugarcane Planting Material, 855.6 लाख यूनिट Planting Material और 52.3 लाख Tissue Culture Plantlets का उत्पादन एवं वितरण किया गया है। सरकारी संस्थान अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरत के अनुसार Location-Specific Production और Crop Protection Technologies भी विकसित कर रहे हैं, ताकि इन्हें बड़े स्तर पर अपनाया जा सके।
Training और Field Demonstration के जरिए किसानों को जोड़ा जा रहा
नई तकनीकों और उन्नत किस्मों को किसानों तक पहुंचाने के लिए Capacity Building Programmes, Demonstrations, Farmer Training, Field Days और Technical Advisories का आयोजन भी किया जा रहा है। इन गतिविधियों में State Agricultural Universities, State Agriculture Departments और Sugar Mills के साथ मिलकर काम किया जा रहा है, ताकि किसान Climate-Resilient Agriculture की तकनीकों को आसानी से अपना सकें।
Sustainable Agriculture पर भी सरकार का जोर
गन्ने की खेती को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए सरकार कई योजनाओं के माध्यम से भी किसानों को सहायता दे रही है। इनमें Paramparagat Krishi Vikas Yojana (PKVY) के तहत Organic Farming, National Mission on Natural Farming (NMNF), Per Drop More Crop (PDMC) के तहत Micro-Irrigation और Soil Health and Fertility Scheme शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि Climate-Resilient Sugarcane Varieties और Sustainable Farming Practices को बढ़ावा देने से मौसम संबंधी जोखिमों के कारण होने वाले Crop Failure को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे किसानों के लिए लंबे समय तक गन्ने की खेती को अधिक टिकाऊ और उत्पादक बनाने की दिशा में भी मजबूती मिलेगी।
