नई दिल्ली: आज़ादी के 77 साल बाद देश की सत्ता का सबसे अहम केंद्र साउथ ब्लॉक अब इतिहास बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) जल्द ही साउथ ब्लॉक से निकलकर सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत बने नए परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मकर संक्रांति के अवसर पर नए कार्यालय में प्रवेश करने की संभावना है।
1947 से साउथ ब्लॉक में था पीएमओ
स्वतंत्रता के बाद से ही प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक में स्थित था। यहां विदेश और रक्षा मंत्रालय भी कार्यरत थे, जबकि नॉर्थ ब्लॉक में गृह और वित्त मंत्रालय थे। अब दोनों मंत्रालय कर्तव्य भवन में स्थानांतरित हो चुके हैं। पीएमओ के स्थानांतरण के साथ ही साउथ ब्लॉक में उसकी 1947 से चली आ रही निरंतर मौजूदगी समाप्त हो जाएगी।
‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ में बदलेंगे नॉर्थ और साउथ ब्लॉक
खाली होने के बाद साउथ और नॉर्थ ब्लॉक को ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ (India Through the Ages Museum) में बदला जाएगा। यह संग्रहालय भारत की 5,000 वर्ष पुरानी सभ्यता और प्रशासनिक यात्रा को प्रदर्शित करेगा। संग्रहालय का पहला चरण अगले वर्ष की शुरुआत में आम जनता के लिए खोले जाने की उम्मीद है।
क्या है ‘सेवा तीर्थ’ (Executive Enclave)?
निर्माण के दौरान ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ के नाम से जाना जाने वाला यह परिसर अब ‘सेवा तीर्थ’ कहलाएगा। यहां तीन अलग-अलग इमारतें बनाई गई हैं—
सेवा तीर्थ-1: प्रधानमंत्री कार्यालय
सेवा तीर्थ-2: कैबिनेट सचिवालय
सेवा तीर्थ-3: राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का कार्यालय
कैबिनेट सचिवालय सितंबर 2025 में ही यहां शिफ्ट हो चुका है, जबकि एनएससीएस भी जल्द स्थानांतरित होगा।
लागत और निर्माण
इस पूरे परिसर का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के लिए किया है। 2022 में ठेका दिए जाने के बाद तैयार इस परियोजना की कुल लागत 1,189 करोड़ रुपये है और यह 2,26,203 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला है।
आधुनिक सुविधाएं और नई कार्यसंस्कृति
‘सेवा तीर्थ’ में अत्याधुनिक तकनीक से लैस बैठक कक्ष बनाए गए हैं, जो भारतीय संस्कृति और परंपराओं की झलक भी दिखाते हैं। यहां नया कैबिनेट बैठक कक्ष तैयार किया गया है। पीएमओ को ओपन-फ्लोर मॉडल में डिजाइन किया गया है, जिससे कार्यसंस्कृति में बदलाव और बेहतर समन्वय की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री का नया आवास भी कार्यालय के पास बनाया जा रहा है। तैयार होने के बाद वह 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित वर्तमान आवास से यहां शिफ्ट होंगे।
औपनिवेशिक प्रतीकों से दूरी
यह बदलाव प्रधानमंत्री मोदी की उस पहल का हिस्सा है, जिसके तहत दिल्ली में औपनिवेशिक प्रतीकों को बदला जा रहा है। इसी क्रम में राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किया गया था। ‘सेवा तीर्थ’ नाम भी कर्तव्य, जिम्मेदारी और जनसेवा की भावना को दर्शाता है।
सेंट्रल विस्टा: नए भारत की पहचान
सेंट्रल विस्टा परियोजना अब बदलते भारत की नई तस्वीर पेश कर रही है, जहां विरासत और आधुनिकता का संगम दिखता है। सभी मंत्रालयों के एक-दूसरे के निकट होने से निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और समन्वय बेहतर होगा। साथ ही, विकसित सार्वजनिक स्थलों और संग्रहालयों के जरिए नागरिकों को लोकतंत्र के केंद्र से जोड़ने की कोशिश की गई है।
नए ‘सेवा तीर्थ’ में पीएमओ का स्थानांतरण न केवल प्रशासनिक ढांचे में बदलाव है, बल्कि यह भारत की बदलती पहचान और भविष्य की दिशा का भी प्रतीक माना जा रहा है।
