नई दिल्ली. डिजिटल कृषि और ई-फार्मिंग प्लेटफॉर्म किसानों के लिए खेती को अधिक लाभकारी और आसान बना रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्थानीय मिट्टी की मैपिंग और स्मार्ट सलाह के जरिए ये ऐप्स किसानों को सही समय पर सही निर्णय लेने में मदद कर रहे हैं। इससे खेती की लागत घट रही है और उत्पादन बढ़ रहा है।
उर्वरकों के सही उपयोग से बच रही किसानों की जेब
खेती में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है उर्वरकों का अधिक उपयोग। कई किसान अनुमान के आधार पर खाद डालते हैं, जिससे खर्च बढ़ने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। ई-फार्मिंग ऐप्स मिट्टी की जांच और फसल की जरूरत के आधार पर नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की सटीक मात्रा बताती हैं। इससे अनावश्यक उर्वरक खर्च कम होता है और फसल को संतुलित पोषण मिलता है।
स्मार्ट सिंचाई से पानी और बिजली दोनों की बचत
डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म खेत की स्थिति और मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर सिंचाई की सही मात्रा निर्धारित करते हैं। इससे पानी की बर्बादी रुकती है और बिजली या डीजल पर होने वाला खर्च भी कम हो जाता है। खासतौर पर जल संकट वाले क्षेत्रों में यह तकनीक किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है।
किसानों को मिल रहा सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का मौका
ई-फार्मिंग ऐप्स किसानों को स्थानीय बाजारों और उपभोक्ताओं से सीधे जोड़ने का काम भी कर रही हैं। डिजिटल मार्केटप्लेस के जरिए किसान अपनी उपज का प्रचार कर सकते हैं और बिचौलियों पर निर्भरता घटा सकते हैं। इससे उन्हें अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
फसल रोगों की तुरंत पहचान और समाधान
AI आधारित कृषि ऐप्स किसानों को फसलों में लगने वाले रोगों और कीटों की पहचान में भी मदद कर रही हैं। किसान केवल मोबाइल से फसल की तस्वीर अपलोड कर समस्या का पता लगा सकते हैं और उपचार संबंधी सलाह प्राप्त कर सकते हैं। इससे समय रहते बीमारी पर नियंत्रण संभव होता है और अनावश्यक कीटनाशक खर्च से भी बचाव होता है।
ये डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों के लिए बन रहे मददगार
कृषि क्षेत्र में कई डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों को आधुनिक तकनीक का लाभ दे रहे हैं। ICAR-IISS e-FARMS वैज्ञानिक आधार पर उर्वरकों की सिफारिश कर उत्पादन बढ़ाने और खाद की बर्बादी कम करने में मदद करता है। वहीं Kisan Suvidha App किसानों को मौसम की जानकारी, मंडी भाव और फसल सुरक्षा से जुड़ी सलाह उपलब्ध कराता है। इसके अलावा E-Farmer और Pro E-Farmer जैसे प्लेटफॉर्म पशुपालन और कृषि प्रबंधन को डिजिटल तरीके से संचालित करने में सहायक हैं।
खेती का भविष्य बन रही डिजिटल तकनीक
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल कृषि तकनीक आने वाले वर्षों में खेती के स्वरूप को पूरी तरह बदल सकती है। कम लागत, बेहतर उत्पादन, संसाधनों का कुशल उपयोग और बाजार तक सीधी पहुंच जैसी सुविधाएं किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
