नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच हवाई यात्रा महंगी होने की आशंका जताई जा रही है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा है कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों का असर 1 अप्रैल से दिखाई दे सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
1 अप्रैल से दिख सकता है ATF महंगाई का असर
विशाखापत्तनम में मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि ATF की कीमतें हर महीने की पहली तारीख को तय होती हैं। इसलिए मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का असर 1 अप्रैल से देखने को मिल सकता है।
उन्होंने कहा, “ATF की कीमतें हर महीने की पहली तारीख को तय होती हैं। इसका प्रभाव 1 अप्रैल से दिखाई दे सकता है।”
सरकार ने कहा- यात्रियों पर बोझ कम रखना प्राथमिकता
मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की कोशिश रहेगी कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर यात्रियों या उड़ान संचालन पर न पड़े। उन्होंने कहा कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय मिलकर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।
नायडू ने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता सुरक्षित उड़ान संचालन सुनिश्चित करना है, खासकर मध्य-पूर्व क्षेत्र में। साथ ही एयरलाइंस से लगातार फीडबैक लिया जा रहा है ताकि संतुलित फैसला लिया जा सके।
23 मार्च से हटेगी घरेलू हवाई किराए की अस्थायी सीमा
इसी बीच नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने घरेलू हवाई किरायों पर लगाई गई अस्थायी सीमा को 23 मार्च से हटाने का फैसला किया है। यह कैप दिसंबर 2025 में इंडिगो उड़ानों में बड़े पैमाने पर हुए व्यवधान के बाद लगाई गई थी, ताकि किरायों में अचानक उछाल को रोका जा सके।
अब परिचालन स्थिति सामान्य होने के बाद सरकार ने एयरलाइंस को किराया तय करने में अधिक छूट देने का निर्णय लिया है। हालांकि ऐसे समय में यह फैसला आया है जब अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर पश्चिम एशिया संकट का असर देखा जा रहा है।
एयर इंडिया और अकासा एयर ने बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज
बढ़ती ATF लागत के चलते एयर इंडिया ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर चरणबद्ध तरीके से फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का फैसला किया है। वहीं अकासा एयर ने भी 15 मार्च से की गई बुकिंग पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए नया फ्यूल सरचार्ज लागू करने की घोषणा की है।
एयरलाइंस का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण जेट फ्यूल की कीमतों में भारी दबाव बना है, जिसका असर परिचालन लागत पर पड़ रहा है।
पश्चिम एशिया संकट से ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्गों से कच्चे तेल और गैस की आवाजाही पर दबाव बढ़ा है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है।
सरकार का दावा- देश में ईंधन की कोई कमी नहीं
इससे पहले 12 मार्च को लोकसभा में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि भारत वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं का सफलतापूर्वक सामना कर रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि देश में पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, ATF और फ्यूल ऑयल की कोई कमी नहीं है।
उन्होंने बताया कि रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं, कई बार 100 प्रतिशत से अधिक उपयोग के साथ, जिससे घरेलू जरूरतों की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है।
क्या यात्रियों को देना पड़ेगा ज्यादा किराया?
फिलहाल सरकार यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ न डालने की बात कर रही है, लेकिन ATF महंगा होने और किराया सीमा हटने के बाद एयरलाइंस को किराए बढ़ाने की अधिक स्वतंत्रता मिल जाएगी। ऐसे में 1 अप्रैल के बाद हवाई टिकट महंगे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
कुल मिलाकर, 1 अप्रैल से हवाई किरायों में बढ़ोतरी के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन अंतिम असर ATF कीमतों, एयरलाइंस की रणनीति और सरकार के हस्तक्षेप पर निर्भर करेगा। यात्रियों के लिए आने वाले कुछ हफ्ते टिकट बुकिंग के लिहाज से अहम रह सकते हैं।
