नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी अब मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर मंथन में जुटी है। राज्य भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने मंगलवार को पुष्टि की कि नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को आयोजित किया जाएगा। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मुख्यमंत्री चयन प्रक्रिया के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है, जबकि ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सह-पर्यवेक्षक होंगे।
9 मई को शपथ ग्रहण, रवींद्र जयंती से जुड़ा विशेष महत्व
भाजपा ने 9 मई की तारीख को खास महत्व देते हुए चुना है। यह दिन नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के रूप में मनाया जाता है। पार्टी इसे सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से प्रतीकात्मक अवसर के रूप में देख रही है।
सुवेंदु अधिकारी सबसे आगे, CM पद के प्रबल दावेदार
भाजपा की जीत के बाद सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर है। नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी इस दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके गढ़ भवानीपुर सीट से हराया है। इससे पहले 2021 में भी उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को मात दी थी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उनके प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है।
अन्य नाम भी चर्चा में, महिला CM पर भी विचार
भाजपा ने अभी किसी एक नाम पर मुहर नहीं लगाई है। समिक भट्टाचार्य और अग्निमित्रा पॉल भी संभावित चेहरों में शामिल हैं। अगर पार्टी महिला मुख्यमंत्री पर दांव लगाती है, तो अग्निमित्रा पॉल एक मजबूत विकल्प बन सकती हैं। वहीं भट्टाचार्य को संगठनात्मक सफलता के आधार पर दावेदार माना जा रहा है।
केंद्रीय नेतृत्व करेगा अंतिम फैसला
भाजपा नेताओं ने साफ किया है कि मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। पार्टी सांसद लॉकेट चटर्जी ने कहा कि सही समय पर नाम की घोषणा की जाएगी।
चुनाव परिणाम पर सियासी बयानबाजी तेज
चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने इसे “हिंदुत्व लहर” और एंटी-इंकंबेंसी का परिणाम बताया। वहीं भाजपा नेताओं ने इसे “जनता की जीत” करार देते हुए ममता सरकार पर निशाना साधा।
दिल्ली मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि जनता ने भाजपा को विकास के लिए बड़ा जनादेश दिया है।
पोस्ट-पोल हिंसा के आरोप, TMC ने जताई चिंता
नतीजों के बाद राज्य के कई हिस्सों से हिंसा की खबरें सामने आई हैं। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उनके पार्टी कार्यालयों पर हमले किए गए। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की पुष्टि नहीं हुई है।
‘सोनार बांग्ला’ के वादे पर टिकी नजरें
भाजपा ने चुनाव के दौरान “सोनार बांग्ला” का वादा किया था। अब सरकार बनने के बाद पार्टी पर विकास और सुशासन के वादों को पूरा करने का दबाव रहेगा।राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही जनता की अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं और नई सरकार के सामने कानून-व्यवस्था, विकास और सामाजिक संतुलन बड़ी चुनौती होगी।
