नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने Death Penalty पाने वाले दोषियों को फांसी देने के मौजूदा तरीके को बदलने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिका में दावा किया गया था कि Hanging से मौत की सजा देना दर्दनाक है और इसके स्थान पर अधिक मानवीय व गरिमापूर्ण तरीका अपनाया जाना चाहिए। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले में फैसला सुनाते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका फैसला केंद्र सरकार को Death Penalty के Execution Method की व्यापक समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर कोई वैकल्पिक तरीका तैयार करने से नहीं रोकता।
जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा था सुरक्षित
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 1 जनवरी 2026 को वैकल्पिक और अधिक गरिमापूर्ण तरीके से Death Sentence को लागू करने की मांग वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। अब अदालत ने मौजूदा याचिका को खारिज कर दिया है, लेकिन केंद्र के लिए इस विषय पर व्यापक स्तर पर विचार करने का रास्ता खुला रखा है।
याचिका में क्या कहा गया था?
वकील ऋषि मल्होत्रा की ओर से दायर याचिका में Hanging के अलावा कई वैकल्पिक तरीकों का सुझाव दिया गया था। इनमें Lethal Injection, Shooting और Electrocution जैसे तरीके शामिल थे। याचिकाकर्ता ने CrPC की धारा 354(5) के तहत फांसी के जरिए Execution की मौजूदा प्रक्रिया को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की थी।
याचिका में यह भी मांग की गई थी कि गरिमापूर्ण मृत्यु का अधिकार Article 21 के तहत Fundamental Right के रूप में मान्यता दी जाए। याचिका के अनुसार, फांसी के बाद मौत की पुष्टि में काफी समय लग सकता है, जबकि कुछ प्रस्तावित वैकल्पिक तरीकों में कम समय लगने का दावा किया गया था।
केंद्र सरकार चाहे तो कर सकती है व्यापक समीक्षा
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अदालत ने केंद्र सरकार के लिए भविष्य में Death Penalty के तरीके की समीक्षा की संभावना खुली रखी है। पीठ ने कहा कि उसका मौजूदा फैसला केंद्र को इस विषय पर व्यापक समीक्षा करने और Execution के लिए किसी वैकल्पिक तरीके पर विचार करने से नहीं रोकेगा।
इससे स्पष्ट है कि अदालत ने मौजूदा कानूनी व्यवस्था में तत्काल बदलाव नहीं किया है, लेकिन Death Penalty को लागू करने के तरीके पर भविष्य में नीतिगत स्तर पर विचार की गुंजाइश बनी हुई है।
फर्जी सुप्रीम कोर्ट वेबसाइट को लेकर भी चेतावनी
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने लोगों को एक Fake Website को लेकर भी सावधान किया है, जो कथित तौर पर अदालत की आधिकारिक वेबसाइट की नकल कर बनाई गई है। कोर्ट ने 13 अगस्त को जारी Public Notice में बताया कि sp-court-in.com नाम की वेबसाइट देखने में सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट जैसी प्रतीत होती है और इसका इस्तेमाल Phishing के जरिए लोगों की निजी या बैंकिंग जानकारी हासिल करने के लिए किया जा सकता है।
निजी और बैंकिंग जानकारी साझा न करने की अपील
सुप्रीम कोर्ट की Registry ने लोगों को चेतावनी दी है कि Cybercriminals ऐसी फर्जी वेबसाइटों के जरिए Password, Personal Details, Banking Information और अन्य Confidential Credentials हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए किसी भी ईमेल, मैसेज या वेबसाइट पर भरोसा करने से पहले उसके Web Address की अच्छी तरह जांच करने की सलाह दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट का Domain sci.gov.in है। अदालत की वास्तविक वेबसाइट पर Case Status, Cause List, Court Orders और अन्य Judicial Services से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होती है।

