नई दिल्ली. कई बार हवाई यात्रा के दौरान यात्रियों को टिकट के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ती है। खासकर त्योहारों, छुट्टियों और अचानक बढ़ी मांग के समय एयरलाइंस के किराए में तेजी देखने को मिलती है। अब ऐसी स्थितियों में केंद्र सरकार के पास हवाई किराए को लेकर हस्तक्षेप करने का अधिकार होगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने नए नियम भारतीय विमानन नियम, 2026 (Bharatiya Vayuyan Niyam, 2026) अधिसूचित किए हैं। ये नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।
नए प्रावधानों के तहत अगर सरकार को लगता है कि कोई असाधारण स्थिति पैदा हो गई है और जनहित में हवाई किराए पर दखल देना जरूरी है, तो वह एयरलाइंस को किराए से जुड़े निर्देश जारी कर सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से दिए जाने वाले निर्देश हालात के अनुपात में होने चाहिए और उन्हें केवल तय अवधि तक ही लागू रखा जा सकेगा।
नियम 192 के तहत सरकार को मिलेगी हस्तक्षेप की शक्ति
भारतीय विमानन नियम, 2026 के नियम 192 के मुताबिक, नियमित हवाई सेवाएं देने वाली एयरलाइंस को परिचालन लागत समेत अन्य जरूरी पहलुओं को ध्यान में रखकर टिकटों का किराया तय करना होगा। इसके साथ ही उन्हें अपने टैरिफ की जानकारी नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को देनी होगी।
नियमों के अनुसार, यदि केंद्र सरकार को लगता है कि असाधारण परिस्थिति पैदा हुई है और सार्वजनिक हित में हस्तक्षेप जरूरी है, तो वह लिखित निर्देश जारी कर सकती है। वहीं, DGCA नियमित विमानन सेवाएं देने वाली कंपनियों के किराए पर नजर रखेगा।
टिकट की कीमतों का पूरा ब्योरा देना होगा
नए नियमों के तहत एयरलाइंस को अपनी वेबसाइट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर टिकटों का किराया सार्वजनिक करना होगा। इसके अलावा यात्रियों को टिकट की कीमत का अलग-अलग ब्योरा भी देना होगा। इसमें बेस फेयर, टैक्स, अन्य शुल्क, टिकट रद्द कराने का चार्ज और रिफंड से जुड़ी शर्तें शामिल होंगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य टिकट की कीमतों को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना और यात्रियों को यह समझने में मदद करना है कि उन्हें कुल कितना भुगतान करना होगा।
1994 से एयरलाइंस तय कर रही हैं टिकटों का किराया
भारत में साल 1994 में हवाई किराया तय करने की व्यवस्था को नियंत्रणमुक्त कर दिया गया था। इसके बाद एयरलाइंस बाजार की मांग और परिचालन लागत जैसे कारकों के आधार पर टिकटों की कीमत तय करने लगीं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुताबिक, किराया तय करते समय मांग, खर्च और टिकट बुक करने के समय जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। इसी वजह से एक ही फ्लाइट में अलग-अलग यात्रियों को अलग कीमत पर टिकट मिल सकता है।
पुराने नियमों से क्या बदलेगा?
पहले लागू Aircraft Rules, 1937 के नियम 135(4) के तहत DGCA को अत्यधिक या अनुचित किराया वसूली, प्रीडेटरी प्राइसिंग और विमानन क्षेत्र में कुछ कंपनियों के दबदबे जैसी स्थितियों में निर्देश जारी करने का अधिकार था।
हालांकि, नए भारतीय विमानन नियमों के नियम 192 में अत्यधिक या प्रीडेटरी प्राइसिंग और ओलिगोपॉली को सरकार के हस्तक्षेप के स्पष्ट आधार के रूप में अलग से सूचीबद्ध नहीं किया गया है। नए नियमों में असाधारण परिस्थितियों और जनहित को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार को किराए पर निर्देश जारी करने की शक्ति दी गई है।
इस तरह नई व्यवस्था में हवाई किराए की निगरानी के साथ पारदर्शिता पर भी जोर दिया गया है। हालांकि, सरकार का हस्तक्षेप सामान्य परिस्थितियों में नहीं, बल्कि असाधारण हालात में और तय शर्तों के तहत ही हो सकेगा।
