नई दिल्ली. केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) से जुड़े फंड मिसएप्रोप्रिएशन (Fund Misappropriation) के एक गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने टिप्पणी की कि त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (Travancore Devaswom Board – TDB) के कुछ कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाने के बजाय निजी लाभ के लिए धन की हेराफेरी में अधिक रुचि रखते नजर आ रहे हैं। इसके बाद कोर्ट ने पूरे मामले की Vigilance Probe का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस केवी जयकुमार की डिवीजन बेंच ने कहा कि कर्मचारियों के आचरण से यह “disturbing inference” निकलता है कि उनका प्राथमिक उद्देश्य श्रद्धालुओं और संस्था की सेवा नहीं, बल्कि personal gain है।
सुओ मोटो केस में आया मामला सामने
यह आदेश सबरीमाला के Special Commissioner की रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए दिया गया। रिपोर्ट में मंदिर परिसर में बिकने वाले “Adiya Sishtam Ghee” की बिक्री से प्राप्त राशि में criminal misappropriation का आरोप लगाया गया था।
₹13.67 लाख की राशि गायब
रिपोर्ट के मुताबिक, 17 नवंबर से 26 दिसंबर 2025 के बीच 13,679 घी पैकेट बिके,कुल राशि ₹13,67,900,लेकिन यह रकम देवस्वोम बोर्ड के खाते में जमा नहीं कराई गई,प्रक्रियागत खामियां भी उजागर विजिलेंस निरीक्षण में यह भी सामने आया कि काउंटर प्रभारी बदले जाने पर स्टॉक वेरिफिकेशन नहीं हुआ Closing balance दर्ज नहीं किया गया, निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया कोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी रकम की कमी को केवल accounting error बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सिस्टमेटिक फेल्योर पर सवाल
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि इतनी कम अवधि में इतने बड़े पैमाने पर धन की हेराफेरी होना supervision, stock control और verification mechanisms की गंभीर विफलता को दर्शाता है। अदालत ने यह भी कहा कि उच्च स्तर के अधिकारियों की जानकारी या wilful blindness के बिना इतनी बड़ी गड़बड़ी संभव नहीं है।
विजिलेंस को FIR और जांच टीम गठित करने का निर्देश
कोर्ट ने Vigilance and Anti-Corruption Bureau के निदेशक को निर्देश दिया कि इस मामले में crime register किया जाए सक्षम अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित कर जांच कराई जाए।
अदालत के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला
Criminal Misappropriation
Accounts Falsification
Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023
और Prevention of Corruption Act, 1988
के तहत अपराध बनता है।
एक महीने में रिपोर्ट देने के आदेश
हाईकोर्ट ने जांच टीम को एक महीने के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने और जांच से जुड़ी किसी भी जानकारी को मीडिया या सार्वजनिक मंच पर साझा न करने का निर्देश दिया है।
