नई दिल्ली. भारतीय अनुसंधान कृषि परिषद (आईसीएआर) ने कृषि विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आईसीएआर ने अरहर यानी अरहर की ‘आशा’ (आशा) का भारत का पहला पूर्ण तरह से एनोटेटेड टेलोमेरे-टू-टेलोमेर (टी2टी) रेफरेंस जीनोम विकसित किया है। अरहर को देश के कई विचारधाराओं में ‘तूर’ या ‘तूर’ के नाम से भी जाना जाता है। इसमें भारत के प्रमुख दलहनी समुद्र शामिल हैं और लोगों के आहार प्रोटीन के महत्वपूर्ण स्रोत में इसकी सबसे बड़ी भूमिका है। ऐसे में इस नई वैज्ञानिक उपलब्धि को देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए भी अहम माना जा रहा है।
क्या है T2T Genome और क्यों है यह उपलब्धि खास?
टेलोमेयर-टू-टेलोमेयर यानी टी2टी जीनोम किसी भी जीव के संपूर्ण डीएनए का अत्यधिक विस्तृत और लगभग संपूर्ण आनुवंशिक खाका उपलब्ध कराता है। आईसीएआर की ओर से यह जीनोम विकसित किया गया है जिसमें सभी 11 क्रोमोसोम की संपूर्ण आनुवंशिक संरचना शामिल है। इसमें सभी 11 सेंट्रोमियर और 22 टेलोमेरेस को शामिल किया गया है, जो कि क्रोमोसोम-स्तर की पूर्णता को दर्शाता है।
नई जीनोम असेंबली में डीएनए के कुल 752.65 मिलियन बेस जोड़े को 92 कंटिग्स में संरक्षित किया गया है। इसका मतलब यह है कि राजकोष को अब अरहर की आनुवंशिक संरचनाओं की पहली इकाई के रूप में कहीं अधिक व्यापक जानकारी उपलब्ध होगी। इस उपलब्धि से लेकर जेनेटिक रिसर्च, ब्रीडिंग और जीनोम एडिटिंग से जुड़े संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
36,557 Genes की हुई पहचान
आईसीएआर के आंकड़ों में इस पूरी तरह से एनोटेटेड जीनोम में 36,557 जीन की पहचान की गई है। मूल रूप से 48,008 mRNAs यानि कोडिंग सीक्वेंस तैयार होते हैं। जीनोम के विश्लेषण और पूर्णता की जांच के लिए ट्रांस्क्रिप्टोम यानी आरएनए अनुक्रम मैपिंग की भी जानकारी ली गयी।
इस प्रक्रिया में 99.9 फीसदी से अधिक Reads का Alignment दर्ज किया गया। यह उच्च स्तर की Mapping Accuracy इस बात का संकेत देती है कि तैयार किया गया Reference Genome काफी सटीक और व्यापक है।
2011 में शुरू हुई थी Genome Research की यात्रा
हर की जीनोमिक्स रिसर्च में ICAR की ये उपलब्धि नहीं हुई। इसमें पिछले वर्षों के वैज्ञानिक अनुसंधान और सतत सुधार शामिल हैं। आईसीएआर-नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर प्लांट बायोटेक्नोलॉजी, नई दिल्ली ने वर्ष 2011 में अरहर की ‘आशा’ की दुनिया का पहला ड्राफ्ट जीनोम प्रकाशित किया था।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास थी क्योंकि यह किसी दलहन फसल का पहला ड्राफ्ट जीनोम था जिसे पूरी तरह से भारत में ही अनुक्रमित किया गया था। इसके बाद वर्ष 2017 में इस ड्राफ्ट जीनोम का उन्नत संस्करण प्रकाशित किया गया। अब इसी वैज्ञानिक यात्रा को आगे बढ़ाते हुए ‘आशा’ का पूरा टेलोमेर-टू-टेलोमेयर जीनोम अनुक्रम तैयार किया गया है।
वैज्ञानिकों और किसानों को होगा फायदा
पूरी तरह Annotated T2T Reference Genome के उपलब्ध होने से वैज्ञानिकों को अरहर में मौजूद महत्वपूर्ण Agronomic और Nutritional Traits से जुड़े Genes की पहचान करने में मदद मिलेगी। इसके आधार पर ऐसी नई किस्मों को विकसित करने की दिशा में काम किया जा सकता है, जो ज्यादा उत्पादन देने के साथ-साथ बदलती जलवायु परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम हों।
इसके अलावा Molecular Breeding और Genome Editing Technologies के इस्तेमाल को भी इससे बढ़ावा मिल सकता है। वैज्ञानिक इस Genetic Resource की मदद से बेहतर बीज विकसित करने और अरहर की Productivity बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर सकेंगे।
Climate-Resilient और High-Yielding Varieties विकसित करने में मदद
भारत में जलवायु परिवर्तन खेती के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अनियमित बारिश, बढ़ता तापमान, सूखा और कीटों का प्रकोप फसलों की उत्पादकता को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में नई वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से Climate-Resilient Crops विकसित करना जरूरी है।
ICAR की नई Genome उपलब्धि से ऐसी अरहर की किस्मों के विकास में मदद मिलने की उम्मीद है, जो Climate Resilience के साथ बेहतर Yield और Nutritional Quality भी प्रदान कर सकें। इससे देश के Pulse Improvement Programme को मजबूती मिलेगी और किसानों की आय बढ़ाने में भी अप्रत्यक्ष रूप से मदद मिल सकती है।
Global Database में जमा किया गया Genome
ICAR की ओर से तैयार Genome Assembly को NIPB_CcT2T_4 नाम दिया गया है। इसे Global Database National Center for Biotechnology Information यानी NCBI में Accession Number GCF_000230855.1 के तहत जमा किया गया है। यह Genome 20 अप्रैल 2026 को जारी किया गया था।
इस Genetic Resource के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने से देश और दुनिया के वैज्ञानिकों को Pigeonpea के Genetics पर आगे Research करने का अवसर मिलेगा। इससे Advanced Gene Analysis, Pangenome Studies और Molecular Breeding जैसे क्षेत्रों में नए शोध को बढ़ावा मिल सकता है।
Pulse Production में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
भारत सरकार पहले से ही देश को Pulses Production में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए सरकार ने वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक ‘Mission for Aatmanirbharta in Pulses’ शुरू किया है। इस मिशन का उद्देश्य दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना, Import Dependence को कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है।
इस मिशन के तहत Improved Seeds, खेती का क्षेत्र बढ़ाने, नई Technology को अपनाने, Assured Procurement और Post-Harvest Infrastructure को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक Pulse Production को करीब 35 Million Tonnes तक पहुंचाना है।
अरहर उत्पादन और Food Security को मिलेगी मजबूती
अरहर भारत की प्रमुख दलहनी फसलों में से एक है और देश की Dietary Protein जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। ऐसे में इसकी Genetic Diversity और Breeding Potential को बेहतर तरीके से समझना Food Security के लिहाज से काफी अहम है।
ICAR का यह T2T Reference Genome वैज्ञानिकों को अरहर की आनुवंशिक संरचना को अधिक गहराई से समझने का अवसर देगा। इसके जरिए बेहतर, अधिक उत्पादक, पोषण से भरपूर और Climate-Resilient Varieties विकसित करने की दिशा में नई संभावनाएं खुलेंगी।
कुल मिलाकर, अरहर की ‘आशा’ किस्म का भारत का पहला Fully Annotated T2T Reference Genome तैयार होना देश के Agricultural Biotechnology और Pulse Research के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे Scientists और Plant Breeders को नई तकनीक और Genetic Data मिलेगा, वहीं लंबे समय में इसका लाभ किसानों, उत्पादन और देश की Food and Nutritional Security को भी मिल सकता है।
