नई दिल्ली: देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) की प्रक्रिया के बीच भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक बदलाव देखने को मिले हैं। The Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 से 2026 के बीच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 18 से 20 मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (Chief Electoral Officers-CEOs) का तबादला किया गया। इस दौरान निर्वाचन आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन में भी वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर कई बदलाव हुए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के तबादलों का यह सिलसिला मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फरवरी 2025 में पदभार संभालने के बाद तेज हुआ। इसी अवधि में देश के कई हिस्सों में मतदाता सूचियों को अपडेट करने और मतदाताओं के नामों के सत्यापन का काम चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ अधिकारियों का कार्यकाल दो साल से भी कम रहा, जबकि सामान्य तौर पर निर्वाचन आयोग मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए कम से कम तीन साल तक पद पर बनाए रखने की परंपरा का पालन करता है।
2025 और 2026 में बढ़े तबादले
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में आठ से नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को बदला गया। वहीं, 2026 में कम से कम 10 तबादले हुए। कुल सात ऐसे अधिकारी थे, जिन्होंने अपने पद पर दो साल से कम समय बिताया।
इससे पहले पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के मई 2022 से फरवरी 2025 तक के करीब 33 महीने के कार्यकाल में लगभग 23 मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के तबादले हुए थे। वहीं, सुनील अरोड़ा और सुशील चंद्रा के संयुक्त 41 महीने के कार्यकाल में करीब 29 तबादले किए गए थे। इन दोनों अवधियों में लोकसभा चुनाव भी शामिल थे।
बिहार से शुरू हुआ तबादलों का सिलसिला
जून 2025 में बिहार से विशेष गहन पुनरीक्षण की शुरुआत हुई थी। इसके बाद अप्रैल में विनोद सिंह गुंजियाल ने एचआर श्रीनिवास की जगह बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी का पद संभाला। मई में नागालैंड और छत्तीसगढ़, जबकि जून में जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में अधिकारियों को बदला गया। जुलाई में मध्य प्रदेश और कर्नाटक समेत अन्य स्थानों पर भी बदलाव हुए।
अगस्त 2025 में मणिपुर और लद्दाख को नए मुख्य निर्वाचन अधिकारी मिले। इसके बाद लक्षद्वीप के निर्वाचन अधिकारी के तबादले का आदेश जारी हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 के बीच लक्षद्वीप में तीन मुख्य निर्वाचन अधिकारी रहे। गौरव सिंह राजावत के नवंबर 2025 में स्थानांतरण के बाद जनवरी 2026 में अवनीश कुमार ने जिम्मेदारी संभाली। जुलाई में उनकी जगह एएस शिवकुमार को नियुक्त किया गया।
दिल्ली, पंजाब और अन्य राज्यों में भी बदलाव
जनवरी 2026 में पंजाब को नया मुख्य निर्वाचन अधिकारी मिला। फरवरी में दिल्ली की मुख्य निर्वाचन अधिकारी आर. एलिस वाज का तबादला कर दिया गया। उन्होंने SIR की तैयारियों से जुड़े कई अहम काम पूरे किए थे। इसी महीने गुजरात में भी बदलाव हुआ। इसके बाद मार्च में सिक्किम और अप्रैल में चंडीगढ़ में नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई।
विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल को मुख्य सचिव नियुक्त किया गया, जबकि नीलम मणि ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी संभाली। अगस्त 2026 में केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू. केलकर की जगह डी. सजित बाबू को नियुक्त किया गया। केलकर को मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन का सचिव बनाए जाने को लेकर भी चर्चा हुई।
निर्वाचन सदन में भी वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर फेरबदल
मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के अलावा निर्वाचन आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन में भी उप निर्वाचन आयुक्त (Deputy Election Commissioners-DECs) के स्तर पर कम से कम चार बड़े बदलाव हुए। भानु प्रकाश येतुरु की नियुक्ति मई 2025 में हुई थी। इसके बाद सितंबर 2025 में पवन कुमार शर्मा और अक्टूबर 2026 में प्रकाश राजपुरोहित की नियुक्ति की गई। वहीं, उप निर्वाचन आयुक्त संजय कुमार को अगस्त 2026 में अचानक उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया।
दिल्ली में 47.5 लाख नामों का दोबारा सत्यापन
इस बीच, दिल्ली में मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए 47.5 लाख नामों का दोबारा सत्यापन किया जा रहा है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार के अनुसार, बूथ स्तर के अधिकारियों (Booth Level Officers-BLOs) को उन मतदाताओं के नामों की फिर से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं, जो गणना चरण के बाद जारी मसौदा सूची में शामिल नहीं थे।
अशोक कुमार ने कहा कि आयोग का प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम मतदाता सूची में किसी भी पात्र मतदाता का नाम छूटने न पाए। दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर को प्रकाशित की जानी है। ऐसे में SIR की प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों के लगातार तबादले और निर्वाचन आयोग में हुए वरिष्ठ स्तर के बदलाव प्रशासनिक निरंतरता को लेकर चर्चा का विषय बन गए हैं।
