नई दिल्ली. Election Analysis 2026: West Bengal से लेकर Tamil Nadu तक हुए विधानसभा चुनावों में NOTA (None of the Above) एक बार फिर ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पाया। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, Assam को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में NOTA वोट 1% से नीचे ही रहे।
राज्यवार NOTA वोट प्रतिशत
Assam – 1.29%
West Bengal – 0.81%
Puducherry – 0.73%
Kerala – 0.58%
Tamil Nadu – 0.41%
इन आंकड़ों से साफ है कि NOTA का इस्तेमाल सीमित ही रहा और यह decisive factor नहीं बन पाया।
क्यों नहीं बढ़ रहा NOTA का प्रभाव?
विश्लेषकों के अनुसारमतदाता अब भी किसी न किसी पार्टी/उम्मीदवार को चुनना पसंद करते हैं। NOTA को symbolic protest vote के रूप में देखा जाता है। इसका चुनाव परिणामों पर direct impact नहीं होता। Lok Sabha Elections में भी गिरा NOTA का प्रतिशत।
चुनाव आयोग की रिपोर्ट Atlas-2024 के अनुसार
2014: 1.08%
2019: (मध्यम स्तर)
2024: 0.99%
यानी पिछले कुछ सालों में NOTA का उपयोग धीरे-धीरे घटा है।
NOTA क्या है?
NOTA (None of the Above) एक ऐसा विकल्प है, जिससे मतदाता यह दिखा सकते हैं किवे किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं देना चाहते, इस विकल्प को Election Commission of India ने 2013 में लागू किया था, जो Supreme Court of India के आदेश के बाद EVM में जोड़ा गया।
पहले क्या था ऑप्शन?
NOTA से पहले मतदाता Form 49-O भरकर वोट न देने का विकल्प चुन सकते थे, लेकिन इससे उनकी voting privacy प्रभावित होती थी, NOTA आने के बाद यह प्रक्रिया पूरी तरह secret ballot system के तहत सुरक्षित हो गई।
क्या NOTA से दोबारा चुनाव हो सकता है?
नहीं।
Supreme Court of India ने यह स्पष्ट किया है कि अगर NOTA को सबसे ज्यादा वोट भी मिल जाएं, तब भी चुनाव दोबारा नहीं कराए जाएंगे, NOTA अभी भी low-impact voting option बना हुआ है। इसका इस्तेमाल अधिकतर protest या dissatisfaction दिखाने के लिए होता है। चुनावी नतीजों पर इसका असर फिलहाल minimal है। Future में electoral reforms के साथ इसका महत्व बढ़ सकता है।
