नई दिल्ली: भारत ने रूस से कच्चे तेल (Crude Oil) के आयात को सुचारू बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। Directorate General of Shipping ने समुद्री बीमा (Marine Insurance) देने वाली रूसी कंपनियों की संख्या बढ़ाकर 11 कर दी है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल कार्गो के लिए यूरोपीय बीमा कंपनियों की उपलब्धता सीमित हो गई है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से आयात जारी रखना चाहता है।
किन कंपनियों को मिली मंजूरी?
भारत ने कई रूसी बीमा कंपनियों को P&I (Protection and Indemnity) कवर देने की अनुमति दी है, जिनमें शामिल हैं:
Gazprom Insurance
Rosgosstrakh Insurance (अनुमति: 2027 तक)
Balance Insurance (2026 तक)
Soglasie Insurance
Sberbank Insurance
Ugoria Insurance Group
ASTK Insurance
इसके अलावा:
VSK Insurance
Sogaz Insurance
Alfastrakhovanie (2030 तक)
Ingosstrakh Insurance (2029 तक)
साथ ही दुबई स्थित Islamic Protection & Indemnity Club को भी 2027 तक अनुमति दी गई है।
वैश्विक हालात का असर
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब Strait of Hormuz में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो रही है Dका प्रशासन ने रूसी तेल खरीद पर अस्थायी छूट (waiver) को बढ़ाया है। यह छूट 16 मई तक लागू रहेगी।
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
रूसी तेल की सप्लाई बनाए रखने में मदद
शिपिंग और बीमा से जुड़े जोखिम कम होंगे
ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) मजबूत होगी
वैश्विक संकट के बीच आयात की निरंतरता बनी रहेगी
यूक्रेन की प्रतिक्रिया
इस बीच Volodymyr Zelensky ने रूस से तेल खरीद पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि रूस के तेल से होने वाली कमाई उसके युद्ध प्रयासों को वित्तीय समर्थन देती है।भारत का यह कदम वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच एक रणनीतिक निर्णय माना जा रहा है। इससे न केवल रूस से तेल आयात जारी रखने में मदद मिलेगी, बल्कि देश की ऊर्जा जरूरतों और आपूर्ति श्रृंखला को भी स्थिर बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
