नई दिल्ली. मध्य प्रदेश के इंदौर में शुक्रवार से BRICS देशों के कृषि मंत्रियों का दो दिवसीय सम्मेलन शुरू हो गया। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत की कृषि उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखा और वैश्विक खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर भी मौजूद रहे।
शिवराज सिंह चौहान ने BRICS देशों से आए प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत की संस्कृति “अतिथि देवो भव:” और “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारत शांति, सहयोग और समन्वय के मार्ग पर चलकर दुनिया के साथ मजबूत साझेदारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका कहना था कि कृषि क्षेत्र में साझा प्रयासों से वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है।
छोटे किसानों की चुनौतियों पर हुई चर्चा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह सम्मेलन छोटे और सीमांत किसानों के सामने मौजूद चुनौतियों पर विचार-विमर्श के लिए महत्वपूर्ण मंच है। जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव, खेती की बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितता जैसी समस्याएं दुनिया के अधिकांश किसानों को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए छोटे किसानों को सशक्त बनाना बेहद जरूरी है।
भारत की कृषि उपलब्धियों का किया उल्लेख
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के कृषि क्षेत्र ने औसतन 4.5 प्रतिशत वार्षिक विकास दर हासिल की है। उन्होंने कहा कि देश का खाद्यान्न उत्पादन लगभग 376 मिलियन टन तक पहुंच चुका है, जबकि गेहूं उत्पादन करीब 118 मिलियन टन है। इसके अलावा बागवानी उत्पादन 378 मिलियन टन से अधिक और मत्स्य उत्पादन 19 मिलियन टन के पार पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक का संचालन कर रहा है, जिससे करोड़ों लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। इन उपलब्धियों का श्रेय किसानों की मेहनत और सरकार की किसान हितैषी नीतियों को जाता है।
कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़: किसान
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की लगभग 43 प्रतिशत कार्यशील आबादी कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर है। उन्होंने बेहतर बीज, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, डिजिटल कृषि सेवाओं और किसान कल्याण योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों ने कृषि क्षेत्र को नई मजबूती दी है।
उन्होंने बताया कि देश के करीब 87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं। ऐसे में उनके आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के बिना ग्रामीण विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा जैसी योजनाएं किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रही हैं।
प्राकृतिक खेती और तकनीक आधारित कृषि पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने टिकाऊ कृषि प्रणाली की आवश्यकता पर बल देते हुए प्राकृतिक खेती और उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश से शुरू किया गया ‘खेत बचाओ अभियान’ किसानों को वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक कृषि क्षेत्र में तेजी से बदलाव ला रही है। डिजिटल सेवाएं, स्टार्टअप और नवाचार आधारित कृषि मॉडल किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद कर रहे हैं।
महिला और युवा बन रहे कृषि परिवर्तन की ताकत
केंद्रीय मंत्री ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों और ‘ड्रोन दीदी’ जैसी पहल के माध्यम से महिलाएं आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़ रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही हैं।
इसके साथ ही युवाओं की कृषि क्षेत्र में बढ़ती रुचि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एग्री-स्टार्टअप और तकनीक आधारित खेती नए अवसर पैदा कर रही है। इससे कृषि क्षेत्र अधिक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बन रहा है।
खाद्य सुरक्षा के लिए BRICS सहयोग की जरूरत
सम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और कृषि स्थिरता जैसे मुद्दे किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। ऐसे में BRICS देशों को अपने अनुभव, तकनीक और संसाधनों को साझा कर कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सम्मेलन कृषि क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देगा और किसानों के हित में ठोस परिणाम सामने आएंगे।

