नई दिल्ली. भारत की बस परिवहन व्यवस्था को अधिक आधुनिक, सुरक्षित, डिजिटल और यात्री-दर्शक बनाने के लिए संसदीय समिति ने कई महत्वपूर्ण सुधारों की वकालत की है। परिवहन, पर्यटन और सांस्कृतिक संसदीय समिति ने स्थिर अखिल भारतीय पर्यटक परमिट को स्थायी करने के लिए अखिल भारतीय यात्री परमिट लागू करने, बस टर्मिनलों के लिए अलग-अलग राष्ट्रीय प्राधिकरण बनाने और पुरातत्व में राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड स्थापित करने की सलाह दी है। समिति की 392वीं रिपोर्ट “समावेशी, डिजिटल और सतत बस परिवहन को सक्षम करना: अगली पीढ़ी की गतिशीलता के लिए नीति, विनियमन और सार्वजनिक-निजी भागीदारी” मंगलवार को राज्यसभा सांसद और समिति के अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पेश किया। समिति ने 6 अगस्त 2026 को इस रिपोर्ट को मंजूरी दी थी।
ऑल इंडिया पैसेंजर परमिट लाने का सुझाव
समिति ने मौजूदा All India Tourist Permit को एक साल के भीतर समाप्त कर उसकी जगह All India Passenger Permit लागू करने की सिफारिश की है। यह परमिट उस राज्य की ओर से जारी किया जाना चाहिए, जहां वाहन का पहली बार पंजीकरण हुआ है। समिति ने परमिट से जुड़े अधिकारों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करने की बात कही है। इसके साथ ही परमिट के नियमों के पालन की निगरानी के लिए VAHAN, FASTag और वाहन लोकेशन डेटा को इलेक्ट्रॉनिक रूप से एकीकृत करने का सुझाव दिया गया है।
समिति ने छह राज्यों में अभी भी मौजूद सीमा जांच चौकियों को हटाने और निगरानी केंद्र स्थापित करने की सिफारिश भी की है। इसके अलावा बस दुर्घटनाओं में घायल यात्रियों के बीमा दावों को अनावश्यक विवादों से बचाने के लिए बीमा नियामक के साथ मिलकर व्यवस्था तैयार करने की बात कही गई है।
बस टर्मिनलों के लिए बनेगा अलग राष्ट्रीय प्राधिकरण
संसदीय समिति ने बस संचालन और बस टर्मिनलों के स्वामित्व को अलग करने को राष्ट्रीय नीति का हिस्सा बनाने की सिफारिश की है। इसके लिए National Bus Terminals Authority स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया है, जिसका मॉडल Airports Authority की तर्ज पर तैयार किया जा सकता है।
समिति ने बस टर्मिनलों पर सभी ऑपरेटरों को बिना भेदभाव के पहुंच देने के लिए एक समान व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है। इसके लिए कश्मीरी गेट बस टर्मिनल मॉडल का उदाहरण दिया गया है। साथ ही एक साल के भीतर National Code for Bus Terminals तैयार करने की सिफारिश की गई है। गुरुग्राम और कटरा को आधुनिक बस टर्मिनल विकसित करने के संभावित मॉडल के तौर पर इस्तेमाल करने का सुझाव भी दिया गया है।
देशभर में बनेगा डिजिटल बस नेटवर्क
रिपोर्ट में National Bus Digital Grid बनाने को प्रमुख सिफारिशों में शामिल किया गया है। समिति ने एक साल के भीतर डिजिटल सेवाओं के लिए interoperability standards तय करने की बात कही है। इसके बाद भारतीय रेलवे की व्यवस्था के अनुरूप बसों के लिए सार्वजनिक live tracking system शुरू करने का सुझाव दिया गया है।
इस डिजिटल व्यवस्था में सरकारी और निजी बस ऑपरेटरों के लिए एकीकृत टिकट बुकिंग की सुविधा, परमिट डेटाबेस से जुड़ी यात्री रेटिंग प्रणाली और नागरिक निगरानी तंत्र शामिल करने की सिफारिश की गई है। इसके माध्यम से यात्री बसों और टर्मिनलों की स्थिति से संबंधित शिकायतों को geo-tagged और time-bound reporting के जरिए दर्ज कर सकेंगे।
समिति ने वाहन ट्रैकिंग और टोल डेटा के आधार पर GIS-based National Bus Network Atlas तैयार करने का सुझाव भी दिया है। इसमें बसों की समयपालन क्षमता, यात्रा की पूर्वानुमेयता और संभावित खतरनाक स्थानों की जानकारी उपलब्ध कराने की बात कही गई है। भविष्य में व्यावसायिक परमिट वाले सभी ऑपरेटरों के लिए इस डिजिटल व्यवस्था में शामिल होना अनिवार्य करने का प्रस्ताव है।
बसों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
समिति ने बसों की सुरक्षा को लेकर भी कई अहम सुझाव दिए हैं। छह महीने के भीतर जिलेवार योजना बनाकर Automated Testing Stations की व्यवस्था पूरी करने की सिफारिश की गई है। हर फिटनेस टेस्ट के दौरान बसों में अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकास और अलर्ट उपकरणों की जांच अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है।
समिति ने sleeper और school buses में सुरक्षा उपकरणों को बाद में लगाने यानी retrofitting की जरूरतों का अध्ययन करने की बात कही है। इसके साथ ही बस ऑपरेटरों के लिए सार्वजनिक Safety Rating जारी करने की सिफारिश की गई है, जिसे परमिट के नवीनीकरण के समय ध्यान में रखा जा सकता है।
इलेक्ट्रिक बसों और लीज मॉडल को बढ़ावा
बस परिवहन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए समिति ने Fleet Transition Compact का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत ऑपरेटरों को बसों का मालिक बने बिना भी उन्हें संचालित करने की सुविधा देने की बात कही गई है। पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्रों के माध्यम से scrap-and-lease model को बढ़ावा देने और निजी वाहनों की स्क्रैपिंग से जुड़े मौजूदा प्रोत्साहनों की समीक्षा करने की सिफारिश की गई है।
इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक ऑपरेटर के लिए निश्चित लक्ष्य के साथ समयबद्ध योजना बनाने का सुझाव दिया गया है। समिति ने बड़े स्तर पर एक समान शर्तों के आधार पर बसों की खरीद और बसों के रूट तथा संचालन वाले क्षेत्रों के अनुसार charging infrastructure विकसित करने की बात कही है। इलेक्ट्रिक बसों और उनकी बैटरियों के इस्तेमाल की अवधि पूरी होने के बाद उनके प्रबंधन के लिए एक साल के भीतर व्यवस्था तैयार करने की भी सिफारिश की गई है।
महिलाओं और पर्यटकों के लिए बढ़ेंगी सुविधाएं
समिति ने व्यस्त समय में महिला चालकों और महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित बस सेवाओं के लिए छह महीने के भीतर विशेष कार्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया है। नई बसों में CCTV cameras लगाने और जिन राज्यों में आपातकालीन अलर्ट सिस्टम लागू नहीं है, वहां इसे विस्तार देने की सिफारिश की गई है। बसों में onboard toilets को Bus Body Code के तहत मानकीकृत करने पर भी जोर दिया गया है।
रात में बसों के ठहराव वाले स्थानों पर साफ-सफाई की नियमित निगरानी की व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया गया है। इसके लिए Inclusive Transport Fund जैसे माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए समिति ने National Tourist Bus Grid बनाने की सिफारिश की है। इसके तहत बस सेवाओं को रेलवे, मेट्रो, हवाई सेवाओं और जल परिवहन से जोड़कर unified ticketing system विकसित करने का प्रस्ताव है। प्रमुख पर्यटन स्थलों पर intermodal transport hubs बनाने और tourist buses के लिए डिजिटल लॉगबुक के साथ केंद्रीकृत और मान्यता प्राप्त Maintenance, Repair and Overhaul (MRO) व्यवस्था तैयार करने की सिफारिश भी की गई है।
बस परिवहन के लिए अलग बजट की मांग
समिति ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के बजट में public transport infrastructure को अलग पहचान देने की सिफारिश की है। मंत्रालय से छह महीने के भीतर इस संबंध में रिपोर्ट देने और सड़क आवंटन का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा सार्वजनिक परिवहन के बुनियादी ढांचे के लिए निर्धारित करने पर अपना विचार रखने को कहा गया है।
इसके अलावा नियमों के अनुरूप बस टर्मिनलों और testing stations के लिए viability gap funding उपलब्ध कराने की सिफारिश की गई है। समिति ने मानक बस स्टॉप डिजाइन को अधिसूचित किए जाने के तीन महीने के भीतर सांसदों के बीच प्रसारित करने का सुझाव दिया है, ताकि MPLADS के जरिए इनके लिए धन उपलब्ध कराया जा सके।
राज्यों की हर साल होगी रैंकिंग
बस परिवहन को लेकर राज्यों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए समिति ने हर साल “State of the States” ranking जारी करने का प्रस्ताव रखा है। इसमें testing stations की उपलब्धता, बस टर्मिनलों तक पहुंच, emergency systems की स्थिति और बस नेटवर्क की समयपालन क्षमता जैसे मापदंडों को शामिल किया जाएगा।
रैंकिंग में बस ऑपरेटरों और यात्रियों से मिले feedback को भी शामिल करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही नागरिक निगरानी व्यवस्था के जरिए प्राप्त शिकायतों के निपटारे की स्थिति को भी रैंकिंग का हिस्सा बनाया जा सकता है। समिति ने कहा है कि पहली रैंकिंग में उन राज्यों की पहचान भी होनी चाहिए, जहां अभी सीमा जांच चौकियां संचालित हो रही हैं।
बस यात्रियों से जुड़ा राष्ट्रीय डेटा सिस्टम बनाने की सिफारिश
समिति ने छह महीने के भीतर देश में बसों की कुल संख्या से जुड़े आंकड़ों का मिलान और समन्वय करने की सिफारिश की है। साथ ही Telangana को VAHAN सिस्टम से जोड़ने और इस दिशा में हुई प्रगति की जानकारी देने का सुझाव दिया गया है।
रिपोर्ट में अलग-अलग श्रेणियों की बसों से जुड़ा एक consolidated data तैयार करने और ऐसा federated national data architecture विकसित करने की सिफारिश की गई है, जिसमें राज्यों के पास उनके अपने सिस्टम का स्वामित्व बना रहे। समिति ने बसों से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या का समय-समय पर आधिकारिक अनुमान जारी करने की भी बात कही है, ताकि अन्य परिवहन माध्यमों के आंकड़ों के साथ बस यात्रियों के आंकड़े भी सार्वजनिक किए जा सकें।
संसदीय समिति की इन सिफारिशों का उद्देश्य देश में बस परिवहन को अधिक inclusive, digital, safe और sustainable बनाना है। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों, सार्वजनिक परिवहन एजेंसियों तथा निजी बस ऑपरेटरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी इन प्रस्तावों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
