नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच देश के उद्योगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट ने ‘इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) 5.0’ को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत ₹2.55 लाख करोड़ तक का अतिरिक्त कर्ज उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें एयरलाइंस सेक्टर के लिए ₹5,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
यह योजना खास तौर पर उन उद्योगों के लिए लाई गई है जो मौजूदा वैश्विक हालात के कारण वित्तीय दबाव का सामना कर रहे हैं। सरकार इस योजना के तहत करीब ₹18,000 करोड़ का खर्च वहन करेगी, जो क्रेडिट गारंटी देने की लागत होगी।
MSME और कंपनियों को कैसे मिलेगा लाभ
इस योजना के तहत MSMEs और अन्य कंपनियों (एयरलाइंस को छोड़कर) को वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में उपयोग किए गए अधिकतम वर्किंग कैपिटल का 20% तक अतिरिक्त कर्ज मिल सकेगा, जिसकी सीमा ₹100 करोड़ तय की गई है। वहीं, एयरलाइंस कंपनियों को 100% तक कर्ज मिलेगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹1,500 करोड़ प्रति उधारकर्ता होगी।
ब्याज दर और अवधि में राहत
सरकार ने इस योजना के तहत गारंटी फीस पूरी तरह माफ कर दी है। MSMEs और अन्य सेक्टर के लिए लोन की अवधि 5 साल होगी, जिसमें 1 साल का मोरेटोरियम शामिल है। एयरलाइंस के लिए यह अवधि 7 साल तय की गई है, जिसमें 2 साल का मोरेटोरियम मिलेगा। बैंकों के लिए ब्याज दर 9% और NBFCs के लिए अधिकतम 13% या तय बेंचमार्क से 0.75% अधिक (जो भी कम हो) रखी गई है।
सरकार का दावा—दुरुपयोग की संभावना कम
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह योजना पूरी तरह सोच-समझकर तैयार की गई है और इसमें दुरुपयोग की संभावना बेहद कम है। उनका कहना है कि इस योजना का लाभ वही उद्योग उठाएंगे जिन्हें वास्तव में जरूरत है।
MSME सेक्टर को मिलेगा बड़ा सहारा
अब तक क्रेडिट गारंटी योजनाओं के जरिए करीब 1.1 करोड़ MSMEs को फायदा मिल चुका है और ₹3.7 लाख करोड़ का कर्ज वितरित किया जा चुका है। नई योजना के तहत MSMEs को 100% और गैर-MSMEs को 90% तक गारंटी कवर मिलेगा।
2027 तक लागू रहेगी योजना
यह योजना NCGTC के दिशा-निर्देश जारी होने की तारीख से लागू होगी और 31 मार्च 2027 तक मंजूर किए गए सभी लोन पर लागू रहेगी। इसमें वे सभी उधारकर्ता शामिल होंगे जिनके खाते 31 मार्च 2026 तक स्टैंडर्ड स्थिति में हैं।
रोजगार और सप्लाई चेन को मिलेगी मजबूती
सरकार का मानना है कि यह योजना उद्योगों को वित्तीय संकट से उबरने, रोजगार बचाने और सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने में मदद करेगी। साथ ही, इससे घरेलू उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा और आर्थिक स्थिरता बनी रहेगी।
