नई दिल्ली. प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विदेशी निवेशकों के लिए कर नियमों को आसान बनाने संबंधी एक अध्यादेश की सिफारिश की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वित्त मंत्रालय के प्रस्ताव पर यह कदम भारतीय वित्तीय बाजारों को विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
रुपये पर दबाव और विदेशी निवेश निकासी बनी चिंता
सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 6 प्रतिशत कमजोर हुआ है। वहीं विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) इस वर्ष जनवरी से अब तक भारतीय शेयर बाजारों से रिकॉर्ड 2.25 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं, जिससे बाजार और मुद्रा दोनों पर दबाव बना हुआ है।
विदेशी पूंजी आकर्षित करने की कोशिश
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित कर राहत विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार में निवेश के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। इससे पूंजी प्रवाह बढ़ने, बाजार में स्थिरता आने और रुपये को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
सिक्योरिटीज की श्रेणियों और राहत के दायरे का इंतजार
फिलहाल सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन प्रतिभूतियों (Securities) को इस प्रस्ताव के दायरे में शामिल किया जाएगा और कर छूट की सीमा क्या होगी। निवेशक और बाजार प्रतिभागी अब अध्यादेश के विस्तृत प्रावधानों का इंतजार कर रहे हैं।
आरबीआई के संभावित कदमों के साथ मिल सकता है असर
रिपोर्ट के अनुसार, यह कर राहत उपाय भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) द्वारा मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद घोषित किए जाने वाले संभावित कदमों के पूरक के रूप में काम कर सकता है। MPC की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हुई है।
अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए व्यापक योजना
सरकार केवल विदेशी निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को राहत देने के लिए अन्य उपायों पर भी काम कर रही है। इनमें उद्योगों के लिए सरकारी समर्थित क्रेडिट सुविधा, निर्यातकों के लिए सहायता और अन्य नीतिगत हस्तक्षेप शामिल बताए जा रहे हैं।
मौजूदा टैक्स ढांचे पर निवेशकों की आपत्ति
वर्तमान में विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज पर 20 प्रतिशत विदहोल्डिंग टैक्स देना पड़ता है। हालांकि जुलाई 2023 से पहले सरकारी प्रतिभूतियों, राज्य विकास ऋणों और रुपये में जारी बॉन्ड पर यह दर केवल 5 प्रतिशत थी।
बजट से पहले FPI ने उठाई थी मांग
केंद्रीय बजट से पहले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के प्रतिनिधियों ने सरकार से सूचीबद्ध प्रतिभूतियों पर पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax) की समीक्षा करने की मांग की थी। उन्होंने कैपिटल गेन टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) दोनों के एक साथ लागू होने को दोहरा कराधान बताते हुए इसमें बदलाव की भी मांग की थी।
डेट मार्केट में निवेश बढ़ाने पर भी विचार
रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार विदेशी निवेशकों के लिए डेट मार्केट को अधिक आकर्षक बनाने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। इसमें टैक्स में बड़ी कटौती और सरकारी बॉन्ड में निवेश से जुड़े कुछ प्रतिबंधों को आसान बनाना शामिल हो सकता है।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अहम कदम
विदेशी फंड निकासी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच सरकार का यह कदम भारतीय वित्तीय बाजारों में निवेशकों का भरोसा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
