नई दिल्ली: ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित बनाने के उद्देश्य से आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन (राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन-2026) का सफलतापूर्वक समापन हो गया। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय इस सम्मेलन में देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित ग्राम, विकसित भारत’ के विजन को साकार करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, सामुदायिक भागीदारी और तकनीक आधारित प्रशासन को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
ग्रामीण विकास योजनाओं की प्रगति की हुई समीक्षा
सम्मेलन के दौरान केंद्र सरकार की विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। राज्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे सफल मॉडल और नवाचारों को साझा किया, ताकि अन्य राज्य भी उन्हें अपनाकर ग्रामीण विकास की गति तेज कर सकें। साथ ही आने वाले वर्षों के लिए नई रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
VB-GRAMG Act, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष चर्चा
सम्मेलन का प्रमुख विषय VB-GRAMG Act, 2025 का प्रभावी क्रियान्वयन रहा। इस कानून के जरिए गांवों के विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने, योजनाओं के बेहतर संचालन और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका मजबूत करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई दिशा मिलेगी।
ग्राम पंचायतों को अधिक सशक्त बनाने की तैयारी
सम्मेलन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों में अधिक अधिकार और जिम्मेदारी दी जाए। पंचायतों को मजबूत बनाकर स्थानीय स्तर पर योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। इससे गांवों की जरूरतों के अनुसार विकास कार्य तेजी से पूरे हो सकेंगे और लोगों की भागीदारी भी बढ़ेगी।
महिलाओं की आजीविका और रोजगार बढ़ाने पर फोकस
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और महिला आधारित आजीविका कार्यक्रमों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। सम्मेलन में कहा गया कि महिलाओं की आय बढ़ाने, उन्हें नए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।
ग्रामीण आवास, सड़क और बुनियादी सुविधाओं को मिलेगी मजबूती
बैठक में ग्रामीण आवास योजनाओं, सड़क संपर्क और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि गांवों में बेहतर सड़क, आवास, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करेंगी, ताकि ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए टिकाऊ आजीविका पर जोर
सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल आजीविका को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। खेती, पशुपालन और अन्य ग्रामीण व्यवसायों को जलवायु के अनुकूल बनाने के लिए नई योजनाएं तैयार करने पर सहमति बनी।
तकनीक आधारित प्रशासन को मिलेगा बढ़ावा
ग्रामीण विकास योजनाओं में डिजिटल तकनीक के अधिक उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि तकनीक के जरिए योजनाओं की निगरानी, पारदर्शिता और लाभार्थियों तक सुविधाओं की पहुंच बेहतर बनाई जाएगी। इससे योजनाओं का लाभ समय पर और सही लोगों तक पहुंच सकेगा।
‘विकसित भारत’ की नींव मजबूत करेंगे विकसित गांव
सम्मेलन के समापन पर ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दोहराया कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश के गांव आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त बनेंगे। केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर सामुदायिक भागीदारी, आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रशासन के जरिए ग्रामीण विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प लिया। मंत्रालय का मानना है कि इस सम्मेलन में हुई चर्चाएं और तय की गई रणनीतियां आने वाले समय में गांवों के समग्र विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

