नई दिल्ली. मुख्य न्यायाधीश (CJI) सुर्या कांत ने गुरुवार को न्यायपालिका में ‘टाइम जस्टिस’ सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए कहा कि जनवरी से सुप्रीम कोर्ट में हर वकील के लिए दलीलें पूरी करने का समय निर्धारित होगा। उन्होंने कहा कि लंबे-लंबे तर्कों के कारण गरीब और जरूरतमंद वादी अपनी सुनवाई से वंचित रह जाते हैं, जो पूरी तरह “अनुचित और अन्यायपूर्ण” है।
गरीब वादी निराश होकर लौटते हैं: CJI
CJI ने कहा कि कई मामले जैसे मोटर एक्सीडेंट क्लेम या जमानत याचिका अक्सर सूची में होते हुए भी नहीं लग पाते, क्योंकि कुछ वरिष्ठ वकीलों की दलीलें घंटों या दिनों तक चलती रहती हैं। उन्होंने कहा कि एक गरीब litigant तारीख पर कोर्ट आता है, पर लंबी बहसों के चलते उसका केस नहीं लग पाता। यह न्याय व्यवस्था के लिए ठीक नहीं।
लिखित सबमिशन और तय समय होगा अनिवार्य
CJI कांत ने स्पष्ट किया कि जनवरी से सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई वाले मामलों में
हर वकील को लिखित सबमिशन जमा करना होगा
और यह बताना होगा कि उनकी दलीलें कितने समय में पूरी होंगी
कोई भी कोर्ट अनावश्यक स्थगन (adjournment) नहीं देगी
उन्होंने कहा कि इससे “असमान विशेषाधिकार” खत्म होंगे, जिनका लाभ अक्सर “प्रभावशाली, संपन्न और हाई-प्रोफाइल” पक्षकार उठाते हैं। कई बार ये बड़े वकील लंबी बहसें करके अन्य मामलों को पीछे धकेल देते हैं, जिससे गरीब और साधारण litigants को नुकसान होता है।
क्रॉनिक PIL और एक्टिविस्ट वकीलों पर भी रोक
CJI ने संकेत दिया कि कुछ “एक्टिविस्ट वकील” और “लगातार PIL दायर करने वाले” वादी अक्सर हर मुद्दे पर तुरंत सुनवाई की मांग कर देते हैं। बार में लंबे समय से शिकायत थी कि इन याचिकाओं को प्राथमिकता देने के प्रयास में अन्य आम लोगों के केस पीछे हो जाते हैं।
धीमी न्याय प्रक्रिया का दर्द: CJI की भावुक कहानी
CJI ने एक मार्मिक उदाहरण साझा किया एक गरीब विधवा अपने पति की रेलवे दुर्घटना में मौत के मुआवजे के लिए 23 साल तक कोर्ट के चक्कर लगाती रही। SC ने आखिरकार 8 लाख रुपये मुआवजा दिया पर तब तक वह निराश होकर गायब हो चुकी थी एक युवा वकील की मदद से उसे ढूंढा गया । उसके नाम पहली बार बैंक खाता खुलवाकर पैसे जमा कराए गए।
उन्होंने कहा कि 23 साल बाद उसके चेहरे पर आई मुस्कान ही बताती है कि न्यायपालिका का काम क्या है—हर वादी के चेहरे पर मुस्कान लाना।
पूर्व CJI बी.आर. गवई का बड़ा बयान
इस बीच, पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में कभी भी राजनीतिक या कार्यपालिका का दबाव महसूस नहीं किया। CJI सुर्या कांत द्वारा लागू किया जा रहा नया ‘टाइम मैनेजमेंट सिस्टम’ सुप्रीम कोर्ट की कार्यशैली में बड़ा बदलाव ला सकता है। इस कदम से गरीब और साधारण वादियों को समय पर न्याय मिलेगा, बड़े वकीलों की लंबी दलीलों पर नियंत्रण होगा कोर्ट में अवसरों की समानता सुनिश्चित होगी यह न्यायपालिका की उस मूल भावना को मजबूत करेगा, जिसके बारे में CJI ने कहा कि हर वादी के चेहरे पर मुस्कान लाना ही हमारा उद्देश्य है।
