नई दिल्ली. कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनुराग शर्मा को उम्मीदवार घोषित किया है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) ने यह घोषणा आगामी राज्यसभा चुनाव को देखते हुए की है, जो 16 मार्च को होने वाला है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च (गुरुवार) तय की गई है।
2024 के राज्यसभा चुनाव में मिली हार से सबक लेते हुए इस बार कांग्रेस ने काफी सोच-समझकर फैसला लिया है। पार्टी ने किसी बाहरी या बड़े राष्ट्रीय चेहरे की जगह पहाड़ी राज्य के स्थानीय नेता को उम्मीदवार बनाकर अंदरूनी असंतोष से बचने की कोशिश की है।
मुख्यमंत्री सुक्खू के करीबी माने जाते हैं अनुराग शर्मा
कांगड़ा जिले के बैजनाथ विधानसभा क्षेत्र से जुड़े अनुराग शर्मा को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का करीबी माना जाता है। वे बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं।
अनुराग शर्मा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1995 में कांग्रेस की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) से की थी। इसी साल जनवरी में उन्हें कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। कांगड़ा हिमाचल प्रदेश का सबसे अधिक आबादी वाला और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिला माना जाता है।
खाली हो रही है भाजपा की सीट
यह राज्यसभा सीट भाजपा नेता इंदु बाला गोस्वामी के कार्यकाल खत्म होने से खाली हो रही है। फिलहाल हिमाचल प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है।
हालांकि विधानसभा में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। 68 सदस्यीय सदन में कांग्रेस के 40 विधायक, जबकि भाजपा के 28 विधायक हैं। ऐसे में पार्टी के पास इस सीट को जीतने का अच्छा मौका माना जा रहा है।
कई बड़े नाम भी थे दावेदारी में
उम्मीदवार तय करने से पहले कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में थे। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, पार्टी प्रभारी रजनी पाटिल, और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा शामिल थे।
राज्य के नेताओं में स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, और वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर तथा आशा कुमारी के नाम भी चर्चा में थे।
2024 की हार के बाद सतर्क हुई कांग्रेस
दरअसल फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था। पार्टी उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी विधानसभा में बहुमत होने के बावजूद चुनाव हार गए थे।
छह कांग्रेस विधायकों और तीन निर्दलीय विधायकों की क्रॉस-वोटिंग के चलते भाजपा के हर्ष महाजन ने जीत हासिल की थी। बाद में ये सभी नौ विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे, जिससे राज्य की राजनीति में काफी हलचल मच गई थी।
नई दिल्ली. कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनुराग शर्मा को उम्मीदवार घोषित किया है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) ने यह घोषणा आगामी राज्यसभा चुनाव को देखते हुए की है, जो 16 मार्च को होने वाला है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च (गुरुवार) तय की गई है।
2024 के राज्यसभा चुनाव में मिली हार से सबक लेते हुए इस बार कांग्रेस ने काफी सोच-समझकर फैसला लिया है। पार्टी ने किसी बाहरी या बड़े राष्ट्रीय चेहरे की जगह पहाड़ी राज्य के स्थानीय नेता को उम्मीदवार बनाकर अंदरूनी असंतोष से बचने की कोशिश की है।
मुख्यमंत्री सुक्खू के करीबी माने जाते हैं अनुराग शर्मा
कांगड़ा जिले के बैजनाथ विधानसभा क्षेत्र से जुड़े अनुराग शर्मा को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का करीबी माना जाता है। वे बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं।
अनुराग शर्मा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1995 में कांग्रेस की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) से की थी। इसी साल जनवरी में उन्हें कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। कांगड़ा हिमाचल प्रदेश का सबसे अधिक आबादी वाला और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिला माना जाता है।
खाली हो रही है भाजपा की सीट
यह राज्यसभा सीट भाजपा नेता इंदु बाला गोस्वामी के कार्यकाल खत्म होने से खाली हो रही है। फिलहाल हिमाचल प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है।
हालांकि विधानसभा में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। 68 सदस्यीय सदन में कांग्रेस के 40 विधायक, जबकि भाजपा के 28 विधायक हैं। ऐसे में पार्टी के पास इस सीट को जीतने का अच्छा मौका माना जा रहा है।
कई बड़े नाम भी थे दावेदारी में
उम्मीदवार तय करने से पहले कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में थे। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, पार्टी प्रभारी रजनी पाटिल, और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा शामिल थे।
राज्य के नेताओं में स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, और वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर तथा आशा कुमारी के नाम भी चर्चा में थे।
2024 की हार के बाद सतर्क हुई कांग्रेस
दरअसल फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था। पार्टी उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी विधानसभा में बहुमत होने के बावजूद चुनाव हार गए थे।
छह कांग्रेस विधायकों और तीन निर्दलीय विधायकों की क्रॉस-वोटिंग के चलते भाजपा के हर्ष महाजन ने जीत हासिल की थी। बाद में ये सभी नौ विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे, जिससे राज्य की राजनीति में काफी हलचल मच गई थी।
