नई दिल्ली: परीक्षा पेपर लीक मामलों और छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस ने मंगलवार को राजधानी दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकालते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
PM आवास की ओर निकाला विरोध मार्च
कांग्रेस नेतृत्व ने प्रदर्शन की शुरुआत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास 10, राजाजी मार्ग से की। इसके बाद कार्यकर्ता प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग की ओर मार्च करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों के हितों की रक्षा की मांग उठाई।
राहुल गांधी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि यह मार्च छात्रों के साथ हुए कथित अन्याय और पुलिस कार्रवाई के विरोध में निकाला गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा से बच रही है और युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचा रही है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की।
CJP के प्रदर्शन के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद
यह प्रदर्शन एक दिन पहले Cockroach Janta Party (CJP) द्वारा संसद मार्च के दौरान हुए घटनाक्रम के बाद किया गया। CJP ने NEET विवाद और अन्य परीक्षा पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
पुलिस ने हिंसा के आरोप लगाए
दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कहा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए थे। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया, पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की। पुलिस का दावा है कि इस दौरान 118 पुलिसकर्मी, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे, घायल हुए।
सियासी टकराव और बढ़ने के आसार
पेपर लीक, छात्रों के विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। संसद के मानसून सत्र के दौरान भी यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठने की संभावना है, जहां विपक्ष सरकार से जवाबदेही की मांग करेगा, जबकि सरकार कानून-व्यवस्था और जांच की कार्रवाई का पक्ष रख सकती है।
