नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी (AAP) में चल रही संकट की स्थिति में अब फ़्रांसीसी संवैधानिक मैसाचुसेट्स की जगह ले ली गई है। मंगलवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और बागी समाज के नेता राघव चड्ढा ने अलग-अलग राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात कर एक-दूसरे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
AAP में टूट से बढ़ा विवाद, संवैधानिक लड़ाई तेज
यह टकराव उस समय और गहरा गया जब AAP के सात राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़कर Bharatiya Janata Party (BJP) के साथ जुड़ गए। इसके बाद से ही दलबदल, वैधता और जनादेश को लेकर राजनीतिक और कानूनी लड़ाई तेज हो गई है।
चड्ढा का आरोप: ‘संवैधानिक अधिकार के इस्तेमाल पर हो रहा उत्पीड़न’
राघव चड्ढा ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर कहा कि उन्होंने लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत पार्टी बदली, लेकिन इसके बाद पंजाब सरकार उनके खिलाफ “वेंडेटा पॉलिटिक्स” कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथियों पर केस दर्ज किए जा रहे हैं, छापेमारी हो रही है और उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। चड्ढा ने कहा कि उन्हें भी जल्द ही निशाना बनाया जा सकता है।
भगवंत मान का पलटवार: ‘यह लोकतंत्र की हत्या’
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पूरे घटनाक्रम को “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया। उन्होंने कहा कि बिना इस्तीफा दिए सांसदों का दूसरी पार्टी में जाना असंवैधानिक है।मान ने यह भी मांग की कि संविधान में संशोधन कर ‘राइट टू रिकॉल’ लागू किया जाए, ताकि जनता अपने चुने हुए प्रतिनिधियों को वापस बुला सके।
90 विधायकों के साथ शक्ति प्रदर्शन
भगवंत मान राष्ट्रपति से मिलने 90 विधायकों के समर्थन के साथ पहुंचे। हालांकि सभी विधायक बाहर ही रहे, लेकिन इसे पार्टी की एकजुटता दिखाने के तौर पर देखा गया। मान ने कहा कि पंजाब की जनता ऐसे “दल बदलने वाले नेताओं” को पसंद नहीं करती।
एजेंसियों के इस्तेमाल पर आरोप-प्रत्यारोप
चड्ढा ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार विजिलेंस, पुलिस और अन्य एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों और नेताओं को परेशान किया जा रहा है, जिससे राज्य का माहौल खराब हो रहा है। वहीं मान ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर किसी के खिलाफ शिकायत मिलती है तो कानून के तहत कार्रवाई होगी, चाहे वह किसी भी पार्टी में क्यों न हो।
केंद्र बनाम राज्य की सियासत भी आई सामने
इस पूरे विवाद में केंद्र और राज्य की राजनीति भी खुलकर सामने आई। मान ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों के जरिए विपक्षी दलों पर दबाव बनाती है। वहीं चड्ढा ने कहा कि उन्हें संविधान और राष्ट्रपति से संरक्षण मिलने का भरोसा है।
AAP का संकट अब राष्ट्रीय बहस का मुद्दा
AAP के भीतर की यह लड़ाई अब केवल पार्टी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह संविधान, लोकतंत्र और दलबदल कानून जैसे बड़े मुद्दों को छू रही है। आने वाले दिनों में अदालत और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका इस विवाद की दिशा तय करेगी, जिस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।
